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दान न दें सरकारी एवं संघी कब्जे वाले मंदिरों में

मूल सनातनी हिंदुओं से आग्रह है कि वे किसी भी सरकारी एवं संघी कब्जे वाले मंदिर में दान न दें, अन्यथा दानकर्ता इनके पाप में बराबर के भागीदार बनोगे!

सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में जब हम दान देते हैं तो हमारे उन पैसों से सरकार अन्य धर्मियों यानी कि गर्मियों को विभिन्न प्रकार की योजनाओं के तहत लाभ देती है। और क्योंकि हमारे द्वारा दान में दिया गया वहां धन केवल देवताओं के लिए ही होता है इसलिए उसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए अन्यथा उसे पाप का भागीदार दान करता अर्थात हम लोग भी होते।

सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के रखरखाव या अन्य प्रकार के खर्च की जिम्मेदारी स्वयं सरकार है। सरकार द्वारा संचालित अथवा स्थानीय राजनैतिक संगठन से जुडे पदाधिकारी संमिलित ट्रस्टों द्वारा प्रबंधित मंदिरों में एक रुपया भी दान न करें।

इस विषय में चारों पीठो के शंकराचार्यों द्वारा अनेक बार स्पष्ट घोषणा की जा चुकी है, फिर भी करोड़ों हिंदू श्रद्धालु द्वादश ज्योतिर्लिंगों, चार धामों तथा इक्यावन शक्तिपीठों आयोध्या हरिद्धार तिरुपति आदि में करोड़ों रुपये का दान अर्पित कर रहे हैं।

साथ ही किसी भी सरकारी एवं संघी कब्जे वाले मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर भी एक रुपया न दें। एक शास्त्र निष्ठ आस्तिक हिंदु के लिए मंदिर के शिखर का दर्शन मात्र ही पुण्य प्राप्ति हेतु पर्याप्त है।

यदि आपके पास अतिरिक्त धन है और आप धर्मकार्य करना चाहते हैं, तो मंदिर के शिखर को साक्षी मानकर उस धन को निकटवर्ती गौशालाओं में रोगग्रस्त, असहाय एवं परित्यक्त गौमाताओं की सेवा में लगाएँ। इससे भी श्रेष्ठ यह है कि आप स्वयं अपने हाथों से हरा चारा, गुड़ अथवा अन्य उपयुक्त आहार खरीदकर गौमाता को खिलाएँ।

ऐसी सेवा न केवल गोसंरक्षण का कार्य करती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि आपका दान वास्तव में किसी जीवित और आवश्यकता से ग्रस्त सनातन के लिए अतिमहत्वपुर्ण जीव के कल्याण में प्रयुक्त हो।

धर्म कि जय हो
अधर्म का नाश हो
प्राणियों मे सद्भावना हो
विश्व का कल्याण हो
गौ हत्या बंध हो
गौ माता कि जय हो
भारत अखंड हो
नमः पार्वती पतये हर हर महादेव

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adminhttp://dharmwani.com
देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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