गुजरात में भगवान् गणेशजी की बड़ी मान्यता है।
गुजरात के कुछ गणेश मन्दिरों का विवरण श्रीअरविन्द नर्मदाशंकरजी शास्त्री, श्रीहिम्मतलाल मूलशंकर काव्यशास्त्री और श्रीनर्मदाशंकर त्र्यम्बकराम भट्टद्वारा प्रेषित विवरण एवं अन्य सूत्रों के आधार पर दिया जा रहा है।
मोढेरा – बेचराजी से मोढेरा १८ मील दूर है। श्रीमातंगीदेवी यहाँ का मुख्य देवस्थान है। यहीं श्रीगणेशजी का उप-मन्दिर है। मोढेरा गाँव के दक्षिण श्रीगणेशजी का एक मन्दिर और है। इसमें सिद्धि और बुद्धि नामक पत्नियों के साथ श्रीगणेशजी की मूर्ति है।
सोमनाथ – यह सौराष्ट्र का प्रमुख स्थान है और भगवान् शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ – लिंग यहीं है। प्राचीन सोमनाथ – मन्दिर के पास श्री अहल्याबाई द्वारा निर्मित एक अन्य सोमनाथ – मन्दिर भी है, जहाँ सोमनाथ- लिंग भूमि के नीचे है। मन्दिर के घेरे में ही श्रीगणेशजी का भी मन्दिर है। इसके अतिरिक्त नगर में भी भगवान् श्रीगणेश का एक मन्दिर है। सोमनाथ-नगर के पास भालकतीर्थ एक स्थान है। यहाँ मोक्षपीपल है। कहते हैं, यहाँ पीपल के नीचे बैठे हुए भगवान् श्रीकृष्ण के चरण में जरा नामक व्याध ने बाण मारा था। चरणों में लगा हुआ बाण निकालकर भालकुण्ड में फेंका गया। भालकुण्ड के पास ही दुर्गकोटि-गणेशजी का मन्दिर है।
जूनागढ़ – सौराष्ट्र के इस प्रसिद्ध नगर में ही भक्त श्रीनरसीमेहता का घर था। नगर में रेवतीकुण्ड से आगे मुचुकुन्द – महादेव तथा भवनाथ – महादेव हैं। मुचुकुन्द- महादेव की स्थापना राजा मुचुकुन्द ने की थी। उस मन्दिर की परिक्रमा में श्रीगणेशजी का मन्दिर है।
सायर — यह स्थान नर्मदा के उत्तरतट पर फतेपुर से चार मील पर है। यहाँ सागरेश्वर मन्दिर है। गाँव में कपर्दीश्वर मन्दिर है, जिसे नारेश्वर भी कहते हैं। यहाँ श्रीगणेशजी ने तप किया था।
सूरत – सूरत में अम्बादेवी का विशाल मन्दिर है। इसमें जो देवी – मूर्ति है, वह एक स्वप्नादेश के अनुसार चार सौ वर्ष पहले अहमदाबाद से सूरत लायी गयी थी। देवी के दाहिने श्रीगणेशजी और शंकरजी तथा बायीं ओर बहुचरादेवी की मूर्ति है।
बड़ोदा – यहाँ कई गणेश मन्दिर हैं। सावरकर गणेश-मन्दिर की मूर्ति मांदार की है। श्रीढुण्डिराज – गणपतिका मन्दिर शिल्पकला तथा वैभव की दृष्टि से बड़ा विख्यात है एवं श्रीविग्रह बहुत भव्य है। नीलकण्ठेश्वर-गणपति की रचना भी कलापूर्ण है। सिद्धनाथ- गणपति के मन्दिर- निर्माण की विशेषता यह है कि जब भगवान् सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन और दक्षिणायन से उत्तरायण जाते समय भूमध्यरेखा पर अवस्थित होते हैं, तब उनकी किरणें मूर्ति पर पड़ती हैं। बड़ोदा शहर में अन्य कई छोटे-छोटे मन्दिर हैं।
गणेश-वट सीसोदरा – यह नवसारी शहर के पास है। यहाँ बड़े-बड़े वटवृक्ष के झुण्ड हैं और उनके बीच में यह एक पक्का बना हुआ मन्दिर है । श्रीगणेशजी की मूर्ति एक फुट ऊँची है। इसकी सूँड़ बायीं ओर मुड़ी है। आगे के थोड़े भाग में जलहरी के साथ महादेव हैं। गणेशजी की मूर्ति के पास पार्वतीमाता की एक प्रतिमा है। इस मन्दिर के आगे के भाग में यहाँ जमीन में एक पट्ट गड़ा हुआ है, जिससे इसके ऐतिहासिक महत्त्व का पता चलता है ।
बलसाड — इस नगर में एक भव्य गणपति- मन्दिर है। यह मन्दिर बहुत प्राचीन है, जिसका जीर्णोद्धार विपुल धनराशि लगाकर हाल में ही कराया गया है। यहाँ दाहिनी सूँड़वाली गणेशमूर्ति चमत्कारिक तथा सिद्धि प्रदान करनेवाली है।
खम्भात – यहाँ श्रीगणेशजी का स्वतन्त्र मन्दिर ब्राह्मणवाड़ा में है, जहाँ श्रीगणेशजी की मनुष्य के कद की भव्य प्रतिमा विराजित है। इसके चार हाथों में चार फणवाले सर्प हैं इसमें सर्प का यज्ञोपवीत भी है। यह मूर्ति बहुत प्राचीन है।
ध्रांगध्रा – यहाँ की सात फीट ऊँची एकदन्त-मूर्ति एक अखण्ड पत्थर में उत्कीर्ण है । मन्दिर जोगसर-तालाब के एक किनारे पर है। दूसरे किनारेपर अन्य मन्दिर भी हैं।
गोरज – यहाँ के सिद्धि-विनायक की मूर्ति चतुर्भुज है । यह मन्दिर पहले से ही एक शमी के पेड़ के नीचे है।
अहमदाबाद – भद्र में यह मन्दिर पेशवाओं के समय का बना हुआ है। भगवान् गणेश की मूर्ति सिन्दूरी रंग की है। इसकी सूँड़ दाहिनी ओर है।
धोलका – यहाँ गणेशजी का एक प्राचीन एवं विशाल मन्दिर है। यहाँ गणेशजी की प्रतिमा के समक्ष अखण्ड दीपक सदैव जलता रहता है।
बलाला – यहाँ के मन्दिर की गणेश प्रतिमा कुआँ खोदते समय मिली थी। बादमें लिंबडी – नरेश ने एक भव्य मन्दिर बनवा दिया।
रामकुण्ड – तापी-नदी के किनारे गणेशजी का मन्दिर है। ऐसा कहा जाता है कि कभी ताड़का वध के बाद भगवान् श्रीराम ने यहाँ आकर इनका पूजन किया था।
सेजकपुर – इस ऐतिहासिक ग्राम में पुरातन सभ्यता तथा संस्कृति के भग्नावशेष हैं, जिसकी खुदाई करते समय विशाल मूर्तियुक्त एक गणेश – मन्दिर भी प्राप्त हआ है।
