मुजफ्फरपुर। यूजीसी एक्ट की पूर्ण वापसी, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए सुविधाएँ, आर्थिक आधार पर आरक्षण और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा की मांग को लेकर सवर्ण समाज संघर्ष मोर्चा, मुजफ्फरपुर ने जन आक्रोश मार्च निकाला। मार्च के बाद मोर्चा के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल, बिहार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र और राज्य सरकारों से शिक्षा, आरक्षण तथा कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष और पारदर्शी कदम उठाने का आग्रह किया गया।
मोर्चा के संयोजक श्री रघुनंदन प्रसाद सिंह उर्फ अमर बाबू ने कहा कि शिक्षा और उच्च शिक्षा से संबंधित नीतियों का विद्यार्थियों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए किसी भी नियम को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और सभी पक्षों की बात सुनना जरूरी है। उन्होंने यूजीसी एक्ट से जुड़े विवादित प्रावधानों को वापस लेने और शिकायतों की निष्पक्ष जांच की व्यवस्था करने की मांग की।
यूजीसी एक्ट की पूर्ण वापसी की मांग
ज्ञापन में मोर्चा ने यूजीसी एक्ट तथा उससे जुड़े नियमों और विनियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग रखी। संगठन का कहना है कि शिकायतों के मामलों में दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। निष्पक्ष जांच, सुनवाई और अपील की स्पष्ट प्रक्रिया होनी चाहिए, ताकि किसी विद्यार्थी, शिक्षक या परिवार को बिना जांच के दोषी न माना जाए। मोर्चा ने झूठी शिकायत करने वालों के लिए दंड का प्रावधान करने और निर्दोष लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।
अमर बाबू ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में शिकायतों का निपटारा निष्पक्षता और उचित प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन जारी रखेगा। उनके मुताबिक, आंदोलन किसी व्यक्ति या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था के समर्थन में है।
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए सहायता
मोर्चा ने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, शुल्क-माफी, छात्रावास और उच्च शिक्षा की अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की मांग की। संगठन ने कहा कि सहायता योजनाओं की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद परिवारों के मेधावी बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल सके।
पूर्व जिला परिषद सदस्य श्री शशि कुमार सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा और रोजगार में वास्तविक सहायता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, छात्रवृत्ति और शुल्क-माफी जैसी सुविधाओं तक पात्र विद्यार्थियों की आसान पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।
आरक्षण व्यवस्था को आर्थिक आधार से जोड़ने की मांग
ज्ञापन में मोर्चा ने आरक्षण व्यवस्था को आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसर तथा सरकारी सुविधाएँ पारदर्शी तरीके से उन परिवारों तक पहुँचनी चाहिए जिन्हें आर्थिक सहायता की सबसे अधिक जरूरत है। मोर्चा ने हर समाज के गरीब परिवारों को शिक्षा और रोजगार में अवसर देने को सामाजिक न्याय का अहम हिस्सा बताया।
श्री धीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक पहुँचना चाहिए। उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने के लिए समान अवसर देना जरूरी है।
कानूनों के दुरुपयोग से सुरक्षा की मांग
मोर्चा ने शिकायतों और कानूनी मामलों में निष्पक्ष प्रारंभिक जांच, दोनों पक्षों की सुनवाई और समयबद्ध न्याय की व्यवस्था करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि झूठी शिकायतों से निर्दोष परिवारों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानी हो सकती है। ऐसे मामलों से बचाव के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और निर्दोष व्यक्तियों के संरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए।
श्री अजीत कश्यप ने कहा कि कानून का उद्देश्य न्याय और सुरक्षा होना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच और सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं है।
एट्रोसिटी एक्ट पर मोर्चा का रुख
मोर्चा ने एट्रोसिटी एक्ट को समाप्त करने की मांग की। संगठन ने यह भी कहा कि जब तक यह अधिनियम लागू है, तब तक मामला दर्ज करने से पहले निष्पक्ष प्रारंभिक जांच, शिकायतकर्ता और आरोपित दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर तथा झूठी शिकायतों के विरुद्ध दंड की व्यवस्था की जाए। साथ ही, निर्दोष व्यक्तियों और उनके परिवारों के संरक्षण के लिए स्पष्ट प्रावधान किए जाएँ। यह मोर्चा की ओर से उठाई गई मांग है। संगठन ने अपने ज्ञापन में कानून के निष्पक्ष इस्तेमाल और उचित जांच प्रक्रिया पर जोर दिया।
मोर्चा ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि केंद्र सरकार और संसद से जुड़े विषयों को अनुशंसा सहित राष्ट्रपति तथा भारत सरकार को भेजा जाए। बिहार से संबंधित मांगों पर राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया। संगठन ने कहा कि उसकी मांगें समान अवसर, पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी हैं।
ज्ञापन सौंपने वाले 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में संयोजक रघुनंदन प्रसाद सिंह उर्फ अमर बाबू, शशि कुमार सिंह, अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा, धीरेंद्र कुमार सिंह, विजय कुमार चौधरी, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अजीत कश्यप, अवधेश प्रसाद सिंह, गणेश प्रसाद सिंह, बिसंबर कुमार पप्पू, मनीष झा, श्रवण कुमार, बृजभूषण मिश्र, रंजन कुमार, रूपेश कुमार, हरे राम मिश्र, महंत मृत्युंजय दास, संजय कुमार सिंह, सुरेश कुमार, सुखेंद्र कुमार ठाकुर और मनोज श्रीवास्तव शामिल थे।
