Tuesday, June 23, 2026
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Chhath Puja : सूर्य उपासना का विशेष पर्व है छठ पूजा

छठ पूजा हिंदू त्योहारों में एक विशेष त्योहार माना जाता है, जो हर वर्ष कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाता है।  लोग पृथ्वी पर हमेशा के लिए जीवन का आशीर्वाद पाने के लिए भगवान सूर्य को धन्यवाद देने के लिए ये त्यौहार मनाते हैं और अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और बुजुर्गों के अच्छे के लिये सफलता और प्रगति के लिए प्रार्थना करते हैं।
Chhath Puja 2021: सूर्य देव की उपासना
छठ पूजा के दौरान केवल सूर्य देव की उपासना की जाती है, अपितु सूर्य देव की पत्नी उषा और प्रत्यूषा की भी आराधना की जाती है। अर्थात प्रात:काल में सूर्य की प्रथम किरण ऊषा तथा सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी उपासना की जाती है। हले यह छठ पूजा पूर्वाचंल बिहार में बहुत प्रसिद्ध था लेकिन अब इसे देशभर में मनाया जाता है।
Chhath Puja 2021:  छठ पूजा चार दिवसीय पर्व
छठ पूजा चार दिवसीय पर्व है। इसका प्रारंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से कार्तिक शुक्ल सप्तमी को यह समाप्त होता है। इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का कठोर व्रत रखते हैं, इस दौरान वे पानी भी नहीं पिते है। पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी नहाय-खाय के रूप में मनाया जाता है। सबसे पहले घर की साफ-सफाई की जाती है, इसके पश्चात छठव्रती स्नान कर पवित्र विधि से बना शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत आरंभ करते हैं। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजन करने के उपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन के रूप में कद्दू-चने की दाल और चावल ग्रहण किया जाता है।
Chhath Puja 2021: सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान एक विशेष महत्व
छठ पूजा का सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान एक विशेष महत्व है। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय दिन का सबसे महत्वपूर्ण समय है जिसके दौरान एक मानव शरीर को सुरक्षित रूप से बिना किसी नुकसान के सौर ऊर्जा प्राप्त हो सकती हैं। यही कारण है कि छठ महोत्सव में सूर्य को संध्या अर्घ्य और विहानिया अर्घ्य देने का एक मिथक है। इस अवधि के दौरान सौर ऊर्जा में पराबैंगनी विकिरण का स्तर कम होता है तो यह मानव शरीर के लिए सुरक्षित है। लोग पृथ्वी पर जीवन को जारी रखने के साथ-साथ आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भगवान सूर्य का शुक्रिया अदा करने के लिये छठ पूजा करते हैं।
छठ पूजा का अनुष्ठान, (शरीर और मन शुद्धिकरण द्वारा) मानसिक शांति प्रदान करता है, ऊर्जा का स्तर और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जलन क्रोध की आवृत्ति, साथ ही नकारात्मक भावनाओं को बहुत कम कर देता है। यह भी माना जाता है कि छठ पूजा प्रक्रिया के उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है। इस तरह की मान्यताऍ और रीति-रिवाज छठ अनुष्ठान को हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार बनाते हैं।
Chhath Puja 2021: छठ पूजा की प्रक्रियाओं के लाभ
छठ पूजा के भक्त शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार कर सकते हैं। विभिन्न प्रकार के त्वचा सम्बन्धी रोगो को सुरक्षित सूरज की किरणों के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। यह श्वेत रक्त कणिकाओं की कार्यप्रणाली में सुधार करके रक्त की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। सौर ऊर्जा हार्मोन के स्राव को नियंत्रित करने की शक्ति प्रदान करती है। रोज सूर्य का ध्यान शरीर और मन को आराम देता है। प्राणायाम, योगा और ध्यान क्रिया भी शरीर और मन को नियंत्रित करने के तरीके है। तीर्थयात्री गंगा नदी के तट पर एक शांतिपूर्ण योग और ध्यान के लिए वाराणसी में आते है।

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Chhath Puja 2021: छठ पर्व के अनेक कथाएं
छठ पर्व कैसे आरंभ हुआ, इसके पीछे अनेक कथाएं हैं। एक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और सीता मैया ने उपवास रखकर सूर्यदेव की पूजा की थी। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था। एक अन्य कथा के अनुसार राजा प्रियवद को कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराकर उनकी पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनाई गई खीर दी थी। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र हुआ, परंतु वह मृत पैदा हुआ। प्रियवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। तभी भगवान की मानस कन्या देवसेना प्रकट हुई। उसने कहा कि सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण वह षष्ठी है। उसने राजा से कहा कि वह उसकी उपासना करे, जिससे उसकी मनोकामना पूर्ण होगी। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी। एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व का आरंभ महाभारत काल में हुआ था। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की थी। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देता था।  आज भी छठ में सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। कुछ कथाओं में पांडवों की पत्नी द्रौपदी द्वारा सूर्य की पूजा करने का उल्लेख है।
Chhath Puja 2021: वैदिक काल से ही की जाती रही है सूर्य की उपासना
पौराणिक काल में सूर्य को आरोग्य देवता भी माना जाता था। भारत में वैदिक काल से ही सूर्य की उपासना की जाती रही है। देवता के रूप में सूर्य की वंदना का उल्लेख पहली बार ऋगवेद में मिलता है। विष्णु पुराण, भगवत पुराण, ब्रह्मा वैवर्त पुराण आदि में इसकी विस्तार से चर्चा की गई है। उत्तर वैदिक काल के अंतिम कालखंड में सूर्य के मानवीय रूप की कल्पना की जाने लगी। कालांतर में सूर्य की मूर्ति पूजा की जाने लगी। अनेक स्थानों पर सूर्य देव के मंदिर भी बनाए गए। कोणार्क का सूर्य मंदिर विश्व प्रसिद्ध है।
– सत्य ऋषि
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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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