Skip to content
17 April 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • अध्यात्म
  • कला-संस्कृति
  • श्रद्धा-भक्ति

सनातन का कल, आज और कल | Sanatan – today and tomorrow

admin 21 February 2021
SUNLIGHT RAYS
Spread the love

भले ही आज दुनिया के तमाम धर्म अपने मार्ग से भटक गये हैं और रचनात्मकता को त्याग कर विध्वंसात्मक गतिविधियों को अपना कर अपना ही सत्यानाश करने पर उतारू हो चुके हैं लेकिन, आज भी हमारी सनातन जीवन पद्धति अपनी उस मुक्तिपथ को भूली नहीं है और संपूर्ण जीवन चक्र की ओर ही अग्रसर है।

सनातन धर्म में कभी भी भौतिक जगत में लिप्त होकर वैभव को सर्वोपरी मान कर जीवन जीना सही नहीं माना गया है। सनातन धर्म का तो मानना है कि हमारी लिप्तता मात्र भौतिक जगत में ही नहीं बल्कि अपनी जीवन पद्धति और आहारचर्या को प्रकृति और योग से जोड़कर जीने की कला को अपना चाहिए। हमें अपनी शक्ति-सामथ्र्य का सदुपयोग आत्ममोत्थान और समाजसेवा में करना चाहिए।

सनातन जीवन पद्धति हमारे तन-मन को निर्मल कर देती है। बस, इस पद्धति को अपनाने की आवश्यकता है। हमें स्थूल जगत का नहीं वरन चेतना का जीवन जीना चाहिए।

जीवन यदि अनमोल है तो स्वयं के द्वारा इसकी कीमत पहचान कर समाज को भी इसके लिए उजागर करना चाहिए। इस धरती पर अनेकों धर्म आये और चले गये मगर सनातन ही एक मात्र वह पद्धति है जो आदिकाल से जस का तस बना हुआ है। इसका कारण यही है कि इस धर्म ने आपके अन्दर की अलौकिक क्षमताओं को पहचान लिया हैं।

क्यों हो रहा है नाश ?
इस संसार के समस्त लोगों को अपने-अपने धर्मों में तरह-तरह से संस्कारवान, धर्मवान तथा कर्मवान बनाया जाता है लेकिन, प्रकृति के प्रति लगाव और प्रेम से संबंधित जीवन पद्धति के विषय में कभी नहीं सिखाया जाता। जबकि सनातन में न सिर्फ अपने बल्कि संपूर्ण जगत की भलाई की कामना को सर्वोपरि मान कर ही शिक्षा दी जाती है।
हमारे वैदिक ग्रंथों में सर्वेभवंतु सुखिनः जैसी शिक्षा दी जाती है। लेकिन, आज जिस परिवर्तन की शुरुआत हो चुकी है और प्रकृति का नाश किया जा रहा है उससे तो यही लग रहा है कि यदि इस धरती पर सनातन जीवन पद्धति नहीं होती तो इस धरती पर से कब की मानव सभ्यता समाप्त हो चुकी होती।
सनातन जीवन पद्धति का प्रकृति प्रेम या लक्ष्य किसी राष्ट्र या देश की सीमाओं तक ही सिमित नहीं होता बल्कि संपूर्ण विश्व और संपूर्ण मानव जीवन के हित के लिए होता है।

क्या है सनातन का लक्ष्य ?
सनातन जीवन पद्धति या धर्म का लक्ष्य आदि काल से अनीति-अन्याय और अधर्म को मिटाकर संपूर्ण मानव जाति के लिए सत्यधर्म की स्थापना करना ही रहा है। हमारे अनेकों ऋषि-मुनियों ने तभी तो मानव जाति के हीत में अनेकों वर्षों तक कठीन तपस्यायें कर के आने वाले समय और काल को समय-समय पर उजागर किया और बचाया है।

सनातन धर्म के अलावा अन्य जितने भी धर्मों के धर्मगुरु रहे हैं उन्होंने कभी भी इस प्रकार का तप या त्याग नहीं किया बल्कि अपनी भोग और विलास की जिंदगी को ही सर्वोपरि मानकर शिक्षाएं दीं और अपने अनुयायियों को भी प्रेरित किया।

आज भी हमारे कई साधू-संत ऐसे हैं जो दूसरे धर्मगुरुओं की तरह आराम का जीवन नहीं जीना चाहते बल्कि समाज कल्याण के लिए अपने शरीर को तपा रहे हैं। सनातन धर्म ही एक मात्र ऐसी धर्म है जो सीधे-सीधे परमसत्ता से जुड़ा हुआ है।

सनातन जीवन पद्धति का लक्ष्य रचनात्मक था और आज भी है, विध्वंसात्मक न कभी था और ना ही आगे भी कभी होगा। जीवन पद्धति में इस संपूर्ण धरती को मां कहा गया है क्यों कि यह में एक जन्म देने वाली माता की भांति ही अन्न और जल देती है। हम इस धरती पर पैदा हुए हैं। यहीं पर हमें शिक्षा भी मिलती है।

क्या है धर्मगुरुओं के कर्तव्य ?
वर्तमान दौर में संपूर्ण दुनिया की राजीतिक, आर्थिक और सामाजिक भेदभावों से भी स्थितियां दर्शा रही हैं कि इस दुर्दशा के लिए अधर्मी-अन्यायी और बेईमान राजनेता ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि ऐसे तमाम धर्मगुरु भी इसके लिए सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं जिन्होंने ईमानदारी से अपना कर्तव्य नहीं निभाया और अपने-अपने धर्मगं्रथों की ही दुर्दशा करवा कर उनमें से अशिक्षा को ही शिक्षा के रूप में पेश कर दिया।

हमारा वैदिक युग कोई साधारण युग नहीं था। इसमें संपूर्ण जीवन पद्धति, जीवन जीने की कला, प्रकृति, अध्यात्म, परमसत्ता से सीधे संवाद, पूजा-पाठ के माध्यम से प्रकृति के नुकसान की क्षतिपूर्ति की संपूर्ण शिक्षा थी और उसपर अमल भी होता था। वैदिक युग में न सिर्फ मानव जीवन बल्कि वायुमंडल और संपूर्ण पशु-पक्षी जगत को भी इसमें भागीदार बना हुआ था।

तमाम धर्मों के लोग यदि आज भी ईमानदारी से हमारी उस वैदिक शिक्षा को अपनाकर उस पर काम करने लग जायें तो आज हर घर, हर समाज, हर राष्ट्र और इस संपूर्ण संसार में एक बार फिर से शांति और विश्वास का वही दौर लौट कर आ सकता है जैसा कि वैदिक युग में हुआ करता था।

– अमृति देवी

About The Author

admin

See author's posts

Post navigation

Previous: एक हजार स्तंभ वाले मंदिर का काला इतिहास | Thousand Pillars Temple in Hyderabad
Next: क्या है हिन्दू धर्म का असली नाम? | Real name of Hinduism

Related Stories

Bhavishya Malika
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

admin 31 March 2026
Ancient indian Psychological Warfare Method
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

admin 31 March 2026
Relationship between the Ramayana and the Vedas
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

admin 27 March 2026

Trending News

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 1
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 2
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026
प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026
  • bharat barand‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • what nonsense is this - let them sayकभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • Bhavishya Malikaभविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

Recent Posts

  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!
  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.