Skip to content
4 April 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • धर्मस्थल
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र

कालभैरव को शराब का चढ़ावा- षडयंत्र या परंपरा? | About Kalabhairava of Ujjain

admin 11 December 2021
मंदिरों में मदिरापान का चढ़ावा - एक सोची समझी शाजिश का शिकार हो चुका है सनातन
Spread the love

– प्रशासन की ओर से भी भगवान भैरोनाथ को क्यों पिलाई जाती है शराब।
– शराब यदि सनातन में वर्जित है तो देवता को इसका प्रसाद चढ़ाना गलत है या सही?

अजय सिंह चौहान | उज्जैन में स्थित काल भैरव के मंदिर के बारे में यह बात तो सभी जानते हैं कि यहां भगवान भैरवनाथ को प्रसाद के तौर पर शराब चढ़ाई जाती है। लेकिन क्या कोई यह बात जानता है कि यह मंदिर वाममार्गी तांत्रिक मंदिर है। प्राचीन काल में सिर्फ तांत्रिक साधनाएं और तांत्रिक क्रियाएं करने वालों को ही इस मंदिर में जाने और पूजा-पाठ की अनुमति थी। लेकिन आज यहां इस चमत्कार को साक्षात देखने और दर्शन करने के लिए देश-विदेश के सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। और यदि आप भी चाहें तो भैरोनाथ जी का मदिरा सेवन रूपी यह चमत्कार साक्षात देख सकते हैं।

उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक श्री काल भैरव का मंदिर हमारी सनातन पौराणिकता का साक्षात प्रमाण है। क्योंकि यहां विराजित श्री काल भैरव की प्रतिमा आज भी साक्षात मदिरापान करती हुई दिख जाती है। और इसी मदिरापान के पीछे कई मान्यताएं भी जुड़ी हैं। उन्हीं मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि यह मदिरापान भगवान भैरोनाथ के नैवेद्य का एक भाग है और यहां मदिरा चढाने के पीछे भी श्रद्धालुओं का भाव यह होता है कि वे अपने मदिरा रूपी दुर्गुणों को भगवान के सामने अर्पित कर देते हैं और भगवान उन दुर्गुणों को साक्षात ग्रहण भी कर लेते हैं।

श्री काल भैरव क्रोध एवं अग्नि से उत्पन्न हुए हैं इसलिए उनको भगवान शिव का उग्र और तेजस्वी स्वरूप माना गया है। लेकिन ऐसा नहीं है कि वे सिर्फ महाक्रोधी देवता ही हैं। वे तो परम दयालु और क्षणभर में प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाने वाले भी कहे जाते हैं। और उनके क्रोध को शांत करने के लिए ही उन्हें मदिरापान कराया जाता है। भगवान काल भैरव के इसी मदिरापान को साक्षात देखने और अद्भुत आश्चर्य का अनुभव करने और दर्शन करने के लिए इस मंदिर में देश-विदेश के हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

धर्म ग्रंथों में भगवान शिव के दो रूपों का वर्णन मिलता है जिसमें भगवान शिव का एक स्वरूप जगत के रक्षक के रूप में जाना जाता है। जबकि दूसरा स्वरूप ठीक उसके विपरीत माना जाता है जिसके अनुसार वे दूसरे स्वरूप कालभैरव के रूप में दुष्टों का नाश करते हैं। और उनका यह रूप अति विकराल और भयंकर है। भगवान शिव के गणों में से एक भैरव को भगवान शिव के रूद्र रूप में पूजा जाता है।

हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान शिव तथा उनके अवतारों को मानने वालों को शैव धर्म से संबंधित कहा जाता है। और अष्ट भैरव यानी आठ भैरवों की पूजा शैव परंपरा का एक हिस्सा है। काल भैरव को आठ भैरवों में प्रमुख माना जाता है। काल भैरव की पूजा पारंपरिक रूप से कापालिका और अघोरी संप्रदायों में होती है और मात्र काल भैरव का यह मंदिर ही नहीं बल्कि संपूर्ण उज्जैन क्षेत्र इन संप्रदायों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है।

खंडित मूर्तियों वाला एक प्राचीन अष्टभुजा धाम मंदिर | Ancient Ashtabhuja Dham Temple

काल भैरव का यह मंदिर वाममार्गी तांत्रिक मंदिर हैं। और वाममार्गी मंदिरों में मुद्रा, मांस, मदिरा और बलि चढ़ाए जाने की परंपराएं होती हैं। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां सिर्फ तांत्रिकों को ही इस मंदिर में जाने और पूजा-पाठ की अनुमति थी क्योंकि वे लोग यहां पर तांत्रिक साधनाएं और तांत्रिक क्रियाए करते थे। लेकिन समय के साथ-साथ यहां आम लोगों का आना-जाना भी होता गया और आम लोगों के लिए भी इस मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिल गई। कुछ समय पहले तक भी यहां पशु बलि की प्रथा जारी थी जो कि अब पूरी तरह से बन्द कर दी गयी है। लेकिन मदिरा का सेवन बंद नहीं किया गया और संभवतः यही कारण है कि आज भी यहां पौराणिक काल से ही मदिरापान कराया जाता है।

इस मंदिर में भगवान काल भैरव को मदिरा का सेवन कब से करवाया जा रहा है और इसके पीछे की मान्यता क्या और क्यूं ऐसा किया जा रहा है इस विषय में कोई भी निश्चित प्रमाण न तो मौजूद हैं और न ही कोई तर्कसंगत जानता है। लेकिन, अगर कोई जानता है तो वो ये कि भगवान भैरवनाथ जी को इस प्रकार से शराब पिलाना न सिर्फ सनातन के एक दम विरूद्ध है बल्कि यह एक प्रकार का षडयंत्र भी है। बावजूद इसके यहां हर दिन, सैकड़ों भक्त काल भैरव को शराब का सेवन करवाने आते हैं।

यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर के पुजारी को शराब की बोतल सौंप देते हैं। वह पुजारी भक्तों के सामने ही उस बोतल का ढक्कन हटाकर एक प्याले में भर कर भगवान भैरव नाथ के होठों से लगाता है और देखते-ही-देखते उस प्याले से वह मदिरा कम होती जाती है और क्षण भर में वह प्याला खाली हो जाता है। बाकी बची लगभग एक-तिहाई मदिरा को बोतल सहीत प्रसाद के रूप में वापस कर दी जाती है।

प्याज-लहसुन: एक औषधि होते हुए भी क्यों है वर्जित, क्यों नहीं खाना चाहिए?

काल भैरव को मदिरा पिलाने का सिलसिला कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ, यह कोई नहीं जानता। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और मंदिर के पंडितों का कहना है कि वे बचपन से भैरव बाबा को मदिरा का भोग लगाते आ रहे हैं और भैरोबाबा भी खुशी-खुशी इसे ग्रहण करते हैं। उनके बाप-दादा भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी उन्हें यही बताते आ रहे हैं कि यह एक तांत्रिक मंदिर था, जहां कभी बलि चढ़ाने के बाद बलि के मांस के साथ-साथ भैरव बाबा को मदिरा भी चढ़ाई जाती थी। बलि प्रथा तो अब यहां बंद हो गई है, लेकिन मदिरा चढ़ाने का सिलसिला वैसे ही जारी है। इस मंदिर की महत्ता को स्थानिय प्रशासन की भी मंजूरी भी मिली हुई है और प्रशासन की ओर से कुछ खास अवसरों पर बाबा को मदिरा चढ़ाई जाती है।

जहां एक ओर मदिरापान के पीछे कई मान्यताएं और श्रद्धाभाव हैं वहीं मान्यताओं और भक्ति के उन भावों को शक की नजर से देखने वाले अक्सर यह सवाल भी उठाते हैं कि यह मात्र एक अंधविश्वास है और कुछ नहीं। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि अगर इस मंदिर के देवता के मदिरापान के रहस्य को अंधविश्वास माना जाता है तो क्यों नहीं कोई आज तक इस रहस्य से पर्दा उठा पाया? और क्यों बड़े-बड़े शोधकर्ताओं ने भी यहां आकर घुटने टेक दिए। आखिर क्यों, अंग्रेजी हुकुमत का एक अंग्रेज अफसर भी बाबा का भक्त बन गया। सच तो यह है कि यह रहस्य विज्ञान के सभी मापदंडों से परे है।

About The Author

admin

See author's posts

4,357

Post navigation

Previous: ईश्वर कौन है, कहां रहता है? | Who is God, where does he live?
Next: आज भी जाग्रत हैं उज्जैन के काल भैरव | Secrets of Kaal Bhairav

Related Stories

Bhavishya Malika
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

admin 31 March 2026
Relationship between the Ramayana and the Vedas
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

admin 27 March 2026
Happy Sanatani New Year on 19th March 2026
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति
  • हिन्दू राष्ट्र

‘रौद्र संवत्सर’ पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी का संदेश

admin 19 March 2026

Trending News

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 1
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 2
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026
प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026

Total Visitor

095325
Total views : 175077

Recent Posts

  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!
  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.