Skip to content
6 April 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • धर्मस्थल
  • श्रद्धा-भक्ति

आखिर क्या है छिन्नमस्तिका माता के वास्तविक रूप का अभिप्राय?

admin 17 November 2021
Chinn-Mastika-Maata
Spread the love

अजय सिंह चौहान || छिन्नमस्तिका माता का शक्तिपीठ मंदिर और इसमें विराजित माता के दर्शन करने के लिए पहली बार आने वाले उनके तमाम भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए माता का यह रूप जितना अद्भूत लगता उतना ही आश्चर्यचकित कर देने वाला माता का यह छिन्नमस्तिका नाम भी होता है। इसके अलावा कुछ श्रद्धालु तो यहां माता का यह स्वरूप देखकर भयभीत भी हो जाते हैं।

दरअसल, मंदिर के गर्भगृह में विराजित माता छिन्नमस्तिका को देवी काली के रूप में पूजा जाता है और माता की इस प्रतिमा के दाएं हाथ में तलवार और बाएं हाथ में उनका यानी स्वयं माता का ही कटा हुआ मस्तक है।

गर्भगृह में विराजित माता की इस प्रतिमा के कटे हुए उस मस्तक में तीन आंखें दिखाई देती हैं। माता का बायां पैर आगे की ओर है जो कमल पुष्प पर रखा हुआ दिखता है। पांव के नीचे कामदेव और रति को विपरीत रति मुद्रा की शयनावस्था में दर्शाया गया है।

माता के दोनों ओर डाकिनी और शाकिनी नामक अन्य दो देवियां भी खड़ीं हैं जो माता के धड़ से निकलने वाले रक्त की दो अलग-अलग धाराओं को पीते हुए दिख रहीं हैं जबकि तीसरी रक्त धारा को माता के बायें हाथ में रखा उनका कटा हुआ मस्तष्क स्वयं भी पी रहा है।

इस मंदिर में है देवी काली का प्रसन्नतादायक दिव्य स्वरूप | Gad Kalika Mata

इसमें मां छिन्नमस्तिका के गले में सर्पमाला के साथ मुंडमाला भी दिखाई देती है। माता के कटे हुए उस मस्तक के केश खुले अैर बिखरे हुए हैं। जबकि माता के हाथ में उनके स्वयं के मस्तक सहित उनका बाकी धड़ भी अन्य आभूषणों से सुसज्जित दर्शाया गया है।

और क्योंकि इसमें माता काली के छिन्नमस्तिका के इसी रूप की पूजा होती है इसलिए यहां गर्भगृह में माता की प्रतिमा भी उसी प्रकार से दर्शायी गई है। यानी इस मंदिर के गर्भगृह में माता की जो प्रतिमा है वह बिना मस्तिष्क के ही है।

जैसे कि यहां माता छिन्नमस्तिका के नाम से ही यह स्पष्ट होता है कि इसमें माता का मस्तिष्क छिन्न है, यानी कटा हुआ है या धड़ से अलग है।

दरअसल, यहां माता को छिन्नमस्तिका नाम क्यों और कैसे मिला इस विषय पर यहां माता की प्रतिमा को देखकर सहज ही कहा जा सकता है। छिन्न का अभिप्राय कट कर अलग हुआ भाग या बिखरा हुआ हिस्सा होता है और यहां पर भी माता का यही रूप उनके छिन्नमस्तिका नाम को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।

माता छिन्नमस्तिका के इस रूप के विषय में एक पौराणिक कथा बताती है कि, देवताओं और असुरों के बीच छिड़े संग्राम में माता पार्वती ने चंडी का रूप धारण करके असूरों का संहार कर देवताओं को विजय दिलाई थी।

इस भीषण संग्राम के बाद भी मां की सहायक योगीनियों डाकिनी और शाकिनी की रक्त पिपासा शांत नहीं हुई, ऐसे में माता ने अपना स्वयं का ही मस्तक काट कर अपने धड़ से बहने वाले रक्त से उन दोनों योगिनियों की रक्त पिपासा को शांत किया था।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मस्तक काटने के बाद माता के शरीर से रक्त की तीन धारायें निकलीं थी। उन तीन धाराओं में से दो धाराओं से डाकिनी और शाकिनी नामक माता की उन दो योगीनियों ने अपनी रक्त पिपासा को शांत कर लिया जबकि, रक्त की तीसरी धारा स्वयं माता के कटे मस्तिष्क के मुंह में जा रही थी और माता स्वयं ही अपने रक्त की उस तीसरी धारा को पी रहीं थी।

Chhinnamasta_Templeपुराणों में वर्णित दस अलग-अलग महाविद्याओं में छिन्नमस्तिका माता के इस रूप को छठी महाविद्या के रूप में माना जाता है।

माता छिन्नमस्तिका का यह पीठ एक जागृत शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय लोगों की आस्था है कि भैरवी और दामोदर नदी का यह संगम स्थल माता पार्वती और भगवान शिव के संगम का प्रतिक है। इसलिए इस शक्तिपीठ की मान्यता और भी अधिक मानी जाती है।

इस मंदिर स्थल के विषय में तमाम जानकारों का मत है कि कई पौराणिक ग्रंथों में इस मंदिर को शक्तिपीठ के रूप में माना गया है। इसलिए यहां यह कहा जा सकता है कि यह मंदिर यहां द्वापर युग यानी महाभारतकाल से पहले भी विद्यमान था। जबकि कुछ लोग इसे महाभारतकाल में स्थापित मंदिर बताते हैं।

जबकि इसे एक सिद्धपीठ के रूप में मानने वालों का मत है कि हजारों वर्ष पहले जब देवी-देवताओं और राक्षसों एवं दैत्यों के मध्य हुए उस भीषण युद्ध के बाद ही माता पार्वती का यह छिन्नमस्तिका स्वरूप सामने आया था। संभवतः इसी कारण यह शक्तिपीठ नहीं बल्कि एक सिद्धपीठ है।

इस पवित्र मंदिर को लेकर तर्क, आस्था, विश्वास, मान्यताएं एवं कथाएं चाहें जो हों, लेकिन, यहां ये बात सच है कि रजरप्पा में स्थित माता छिन्नमस्तिका का यह मंदिर मात्र एक सिद्ध या शक्तिपीठ ही नहीं बल्कि धर्म, अध्यात्म और आत्मशक्ति की त्रिवेणी के रूप में माना जाता है।

भैरवी और दामोदर नदी के संगम स्थल पर स्थित होने के कारण माता छिन्नमस्तिका का यह शक्तिपीठ धाम प्रकृति की गोद में बसा मात्र एक धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और तांत्रिक शक्तियों का भी प्रमुख केन्द्र है।

खंडित मूर्तियों की दर्दभरी कहानी कहता अष्टभुजा धाम मंदिर | Ruined Temple

भारत के सबसे प्राचीनतम मन्दिरों में से एक माना जाने वाला माता छिन्नमस्तिका का यह शक्तिपीठ धाम मंदिर झारखंड राज्य की राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर रजरप्पा नामक क्षेत्र में स्थित है।

पौराणिक मत के अनुसार माता छिन्नमस्तिका के प्रमुख उपासकों में महर्षि यमदाग्नि, शुक्राचार्य, परशुराम और गुरु गौरक्षनाथ जैसे नाम भी रहे हैं। इसलिए इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और देवी सती के 51 शक्तिपीठों में दूसरा सबसे विशेष महत्व का शक्तिपीठ धाम माना जाता है।

यहां बहने वाली भैरवी नदी का जल भी वाराणसी और हरिद्वार में बहने वाली गंगा नदी के जल की तरह ही पवित्र है। इसमें स्नान करके भक्त मां छिन्नमस्तिका के दर्शन करने जाते हैं। देश-विदेश के कई साधक यहां नवरात्र और अमावस्या आदि के विशेष अवसरों पर तंत्र साधना करने आते हैं।

About The Author

admin

See author's posts

2,475

Post navigation

Previous: आखिर इतनी महंगी और कठिन क्यों है ‘छोटा चार धाम’ की यात्रा’?
Next: दाल-बाटी-चूरमा का इतिहास और वर्तमान | History of Dal-Bati-Churma

Related Stories

Bhavishya Malika
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

admin 31 March 2026
Relationship between the Ramayana and the Vedas
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

admin 27 March 2026
Happy Sanatani New Year on 19th March 2026
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति
  • हिन्दू राष्ट्र

‘रौद्र संवत्सर’ पर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी का संदेश

admin 19 March 2026

Trending News

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 1
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 2
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026
प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026

Total Visitor

095647
Total views : 175661

Recent Posts

  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!
  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.