Wednesday, June 3, 2026
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दिल्ली को शराब की राजधानी बनाने पर आमादा दिल्ली सरकार | Liquor Shops in Delhi

यह विचित्र विडंबना है कि जो लोग राजनीति बदलने आये थे, वे परंपरागत या वर्षों से घिसी-पिटी राजनीति को आगे बढ़ाने में सबसे आगे निकल गये। दिल्ली के संबंध में सबसे अधिक अव्वल बात तो यह है कि सरकार ने जो नई आबकारी नीति बनाई है उसके तहत लगता है कि राजधानी दिल्ली को शराब की राजधानी बनाने का निश्चय कर चुकी है।

दिल्ली में अब शराब पीने की उम्र 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष कर दी गई है जबकि यही वह उम्र होती है जब युवा वर्ग अपने भविष्य एवं कैरियर पर ध्यान दे सकता है। युवाओं के लिए यह बेहद नाजुक उम्र मानी जाती है। इस उम्र में युवा आसानी से फिसल भी जाते हैं किन्तु इसी उम्र में दिल्ली सरकार युवाओं को शराब पीने का आदी बनाना चाहती है।

राजधानी दिल्ली में अब तक शराब की 260 प्राइवेट दुकानें, थीं, लेकिन दिल्ली सरकार ने इनकी संख्या 849 प्रकार कर दी है। नगर निगम के 272 वार्डों में से 80 ऐसे थे जिनमें शराब की कोई दुकान नहीं थी किन्तु अब हर वार्ड में तीन दुकानें खोली जा रही हैं।

दिल्ली में अब शराब के अड्डों की संख्या बढ़ाकर तीन हजार से ज्यादा की जा रही है। 849 दुकानों के अलावा लगभग एक हजार बैंक्वेट हालों को भी पक्के लाइसेंस दिये जा रहे हैं। इसके अलावा रेस्टोरेंट, बार और क्लबों में भी शराब के अड्डे खोले जा रहे हैं। दिल्ली सरकार को स्वयं इस बात का विचार करने की आवश्यकता है कि वह क्या कर रही है?

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एक तरफ दिल्ली सरकार शराब के अड्डों की संख्या बढ़ाकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रही है तो दूसरी तरफ प्रदूषष की समस्या को वह गंभीरता से लेन ही नहीं चाहती। प्रदूषण के निपटने के नाम पर दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के पास अब मात्र स्कूलों को बंद करन और चैराहों पर अपने कार्यकर्ताओं को खड़ा कर उनसे अपना प्रचार करवाना मात्र उद्देश्य रह गया है।

आज देश के तमाम मेट्रो शहरों एवं अन्य बड़े शहरों में प्रदूषण के कारण लोगों का जीवन बहुत ही कष्टदायी हो गया है। इस दृष्टि से यदि राजधानी दिल्ली की बात की जाये तो स्थिति और भी भयावह है। यहां प्रदूषण की स्थिति को देखकर अदालत को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा है। दिल्ली सरकार भले ही इस समस्या के लिए पड़ोसी राज्यों को कोसती रहती है किन्तु सच्चाई यह है कि वह अपने हिस्से का कार्य जरा भी करना नहीं चाहती है। दिल्ली सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।

– श्रेया सिंह, वेस्ट विनोद नगर (दिल्ली)

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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