Friday, June 5, 2026
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उज्जैन का पौराणिक ‘रूद्र सरोवर’ आज किस दशा में है

अजय सिंह चौहान | स्कन्द पुराण के अवन्तिखंड को पढ़ने पर उज्जैन के “रूद्र सरोवर” या रूद्र सागर का उल्लेख विस्तार से मिलता है जिसके अनुसार इसी रूद्र सरोवर से भगवान् महाकाल प्रकट हुए थे और उसके बाद इसी के किनारे पर उनके ज्योतिर्लिंग की स्थापना की गई थी. इसीलिए इस सरोवर का नाम रूद्र सरोवर पड़ा है। यही कारण है की भगवान् महाकाल के ज्योतिर्लिंग मंदिर के सामान ही रूद्र सागर भी महत्त्व है। अवन्तिखंड के अनुसार भगवान् शिव स्वयं कहते हैं की भूतल पर पुष्कर सरोवर तीर्थ के सामान ही इस रूद्र सरोवर का भी महत्त्व है।

व्यास मुनि जब सनत्कुमार जी से पूछते हैं कि इस सुन्दर महाकाल वन में अवन्ति क्षेत्र के भीतर कितने तीर्थ विधमान हैं तो इस विषय में नारद जी और भगवान् शिव के बीच जो संवाद होता है उसका वर्णन करते हुए सनत्कुमार जी बताते हैं की भगवान् शिव स्वयं अवन्ति क्षेत्र के महत्त्व को कह रहे हैं कि भूतल पर पुष्कर आदि जो कोई भी तीर्थ हैं वे सभी उत्तम महाकाल वन में वर्तमान है. केवल रुद्र सरोवर में ही असंख्य सहस्त्र कोटि (करोड़ों) तीर्थ स्वयं यहाँ आकर स्नान करते हैं इसलिए इसका नाम कोटि तीर्थ है।

व्यास मुनि सनत्कुमार जी से आगे पूछते हैं कि अब आप मुझे ऐसा कोई उपाय बताइये, जिससे मनुष्य थोड़े ही समय में अवन्तितीर्थ के सेवन का पूरा फल प्राप्त कर ले तथा सिद्ध होकर शिवलोक को चला जाय, इस पर सनत्कुमार जी बताते हैं कि मनुष्य एकाग्रचित्त होकर महाकाल वन में जाय और कोटितीर्थ (रुद्र सरोवर) में स्नान करे। ऐसा करने वाले मनुष्य का फिर इस संसार में जन्म नहीं होता। इस सरोवर के सामान ही भूतल पर शिप्रा भी एक ऐसी पावन नदी है जिसके दर्शन मात्र से मुक्ति हो जाती है। इसी प्रकार उन्होंने उज्जैन के सैकड़ों ही नहीं हज़ारों तीर्थों का उल्लेख किया है जहां स्वयं देवी-देवता निवास करते हैं।

हालाँकि, आज यदि वास्तविकता देखी जाय तो उज्जैन के ही अधिकतर निवासियों को यह नहीं पता होगा कि यह रूद्र सागर कौन-सा है और कहाँ है, या फिर है भी या केवल पुराणों में ही इसका वर्णन मिलता है। क्योंकि अधिकतर सनातनी समाज स्वयं ही अपने मूल धर्म और धार्मिक क्षेत्रों को भूलता और खोता जा रहा है. यह सच है कि धरातल पर इस कोटितीर्थ या रुद्र सरोवर के विषय में पुराणों के जानकार तो जानते हैं लेकिन अन्य लोगों को इस विषय में कितनी जानकारी है ये हमें उज्जैन का महाकाल लोक यानी महाकाल कॉरिडोर बता देता है। दरअसल, वर्ष 2022 में जिस स्थान पर “महाकाल लोक” का निर्माण किया गया है वास्तव में वही पौराणिक काल का पवित्र कोटितीर्थ यानी रुद्र सरोवर हुआ करता था।

Mahakal Lok Ujjain

आज ठीक उसी सरोवर के स्थान पर “महाकाल लोक” यानी पश्चिम की तर्ज पर एक ऐसा डिज्नीलेंड बना दिया गया है जो धार्मिक यात्रियों को अपने मोक्ष मार्ग से भटका कर इस डिज्नीलेंड की ओर आकर्षित करने और एक प्रकार से धन कमाने या उगाही का माध्यम बन चूका है। दुर्भाग्य तो ये भी है की इसी महाकाल लोक में प्लास्टिक की मूर्तियों को भी खड़ा कर दिया गया है जिसका सनातनी धर्म में कोई स्थान ही नहीं होना चाहिए. वास्तव में देखा जाय तो महाकाल लोक का निर्माण करके उस रूद्र सरोवर के मूल धार्मिक महत्त्व और इसके वास्तविक ओरा को ही समाप्त कर दिया गया है।

स्कन्द पुराण के अनुसार यह रुद्र सरोवर लगभग तीन किलोमीटर की परिधि और विस्तार वाला एक ऐसा पवित्र सरोवर है जिसमें कभी देवता भी स्नान कर भगवान् महाकाल के दर्शन किया करते थे। इतिहास में जाएँ तो पता चलता है कि अठारवीं शताब्दी तक भी यानी मराठा शासन के समय में भी रुद्र सरोवर अपने उसी मुल अस्तित्व को लगभग बनाये हुए था। लेकिन समय के साथ-साथ इसकी अनदेखी होती गई जिसका परिणाम आज हमारे सामने है।

हालांकि महाकाल लोक के निर्माण से पहले भी इस रूद्र सरोवर में आस-पास की छोटी-बड़ी कई नालियों का बदबूदार पानी जमा होता रहता था, कूड़े के ढेर लगे रहते थे. सरोवर के नाम पर इसमें शुद्ध जल का तो नाम भी नहीं होता था। इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि इसके मूल अस्तित्व के साथ किस सरकार ने न्याय किया और किसने अन्याय। लेकिन वर्ष 2022 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक प्रकार से यहां नवनिर्मित महाकाल लोक या महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन कर यह बता दिया की हमने इसके उस शेष बचे धार्मिक और पौराणिक महत्त्व को भी समाप्त कर दिया है जो इस सरोवर क्षेत्र के खाली और सुनसान रहने के कारण थोड़ा-सा बना हुआ था।

स्थानीय संत समाज और अन्य जानकारों का कहना है कि सरकार को इस स्थान के महत्त्व के अनुसार ही पुनर्जीवित किया जाना चाहिए था, लेकिन हर एक सरकार ने इसको मात्र सरकार की खाली जमीन ही समझा। आश्चर्य तो इस बात का है की स्वयं को हिंदूवादी कहने वाली सरकार ने भी आज इसी सरोवर के भूभाग पर तथाकथित धार्मिक स्थान यानी महाकाल लोक बना कर अपने अज्ञान और षड्यंत्र का परिचय दे दिया और उन हिन्दुओं को खुश कर दिया जिनको यहाँ केवल रोज़गार और धन अर्जन का माध्यम दिख रहा है।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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