Skip to content
18 April 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल

त्रिपुरसुंदरी शक्तिपीठ का पौराणिक महत्व और धार्मिक मान्यताएं

admin 15 February 2021
Tripurasundari Shaktipeeth
Spread the love

अजय सिंह चौहान | पवित्र 51 शक्तिपीठों में से, एक भारत के उत्तर-पश्चिमी राज्य, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर, दक्षिणी त्रिपुरा में, प्राचीनकालीन उदयपुर शहर से करीब 5 किमी की दूरी पर, राधा किशोर नाम के एक छोटे से कस्बे में श्री त्रिपुरसुंदरी देवी (Tripur Sundari Mata Shaktipeeth Temple in Tripura) का एक ऐसा शक्तिपीठ मंदिर जो जागृत शक्तिपीठ मंदिरों की श्रेणी में आता है।

शास्‍त्रों और मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर माता सती का दाहिना पैर, यानी दक्षिण पाद गिरा था। ये शक्तिपीठ मंदिर गोमती नदी के किनारे की एक कछुए के आकार वाली पहाड़ी पर स्थित है। माताबाड़ी, यानी माता के इस शक्तिपीठ मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि पुराणों में इस पीठ को जागृत शक्तिपीठ होने के साथ-साथ कूर्म पीठ के रूप में भी माना है। यहां देवी को त्रिपुरसुंदरी और भगवान शिव को त्रिपुरेश कहा जाता है।

इसके अलावा, त्रिपुरसुंदरी माता के इस मंदिर (Tripur Sundari Mata Shaktipeeth Temple in Tripura) को क्षेत्रिय स्तर पर एक विशेष तंत्र पीठ के रूप में भी जाना जाता है। इन सबसे अलग, इस शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि इसे दस महाविद्याओं में भी माना जाता है। हालांकि, कुछ विद्वानों का मानना है कि ये वो शक्तिपीठ नहीं है जिसे दस महाविद्याओं में माना जाता है।

त्रिपुरसुंदरी माता के इस मंदिर से जुड़े पौराणिक तथ्यों और महत्व के अनुसार, त्रिपुरा मगधेश्‍वरी राज्य की राजधानी हुआ करता था। इसके अलावा इसी स्थान पर माता त्रिपुरसुंदरी देवी ने

त्रिपुरासुर नाम के एक असुर का वध किया था जिसके बाद से इस क्षेत्र का नाम भी त्रिपुर हो गया और उस असुर का वध करने वाली देवी को यहां त्रिपुरेश्वरी देवी कहा जाने लगा।

त्रिपुरा सहीत संपूर्ण उत्तर-पश्चिमी राज्यों में माता के इस शक्तिपीठ मंदिर को ‘माताबाड़ी‘ के नाम से पहचाना जाता है। यहां स्थानीय भाषा में माताबाड़ी का मतलब है माता का मंदिर या माता का घर।

सन 1947 में हुए भारत विभाजन के बाद से भारत के इस संपूर्ण उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए अब शायद यही एक ऐसा इकलौता पवित्र मंदिर बचा है जहां आदिकाल से यानी युगों-युगों से पूजा होती आ रही है। जबकि सन 1947 से पहले तक यहां से करीब 150 किमी की दूरी पर ढाका शहर में देवी ढाकेश्वरी का दूसरा शक्तिपीठ मन्दिर भी हुआ करता था जो देश के बंटवारे के बाद, बांग्लादेश में जा चुका है, इसलिए आम भारतीय श्रद्धालुओं के लिए वहां दर्शन करने जाना ना ही आसान है और ना ही संभव।

पावागढ़ के महाकाली शक्तिपीठ मंदिर में आज भी होता है दिव्य शक्ति का आभास | Pavagadh Shaktipeeth Temple

Tripura Sundari Shaktipeeth Temple Tripura 2माता त्रिपुरसुंदरी का ये शक्तिपीठ मंदिर एक कछुए के आकार वाली पहाड़ी पर स्थित है, और क्योंकि कछुए को संस्कृत में ‘कूर्म‘ कहा जाता है, इसलिए इस स्थान को भी कूर्मपीठ कहा जाता है। इसके अलावा, हमें यहां इस बात के प्रमाण मंदिर के वास्तु को देख कर भी आसानी से मिल जाते हैं।

माता त्रिपुरसुंदरी के इस शक्तिपीठ मंदिर की बनावट को दूर से देखने पर लगता है जैसे यह एक पारंपरिक बंगाली झोपड़ी की हूबहू नकल करके बनाया गया है। इसलिए इसमें गोलाकार ऊंचे गुंबद के स्थान पर एक वर्गाकार गर्भगृह है। इस गर्भगृह का कुल क्षेत्रफल 24 गुणा 24 फुट है और इसकी ऊंचाई 75 फुट बताई जाती है।

माता त्रिपुरसुंदरी शक्तिपीठ मंदिर से जुड़े कुछ ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, माता का ये मंदिर सोलहवीं सदी के प्रारंभिक दशक में, यानी वर्ष 1501 में महाराजा ध्यान माणिक्य के शासनकाल में बन कर तैयार हुआ था। इस हिसाब से वर्तमान में यह इमारत करीब 520 वर्षों से भी ज्यादा पुरानी है।

त्रिपुरा राज्य में महाराजा ध्यान माणिक्य का शासनकाल सन 1490 से सन 1515 ईसा पूर्व तक रहा था। हालांकि, कुछ लोग इसे 11वीं सदी में बना हुआ मंदिर भी बताते हैं, लेकिन इस बात के यहां कोई खास प्रमाण मौजूद नहीं है।

त्रिपुरसुंदरी देवी के मंदिर का परिसर और इसके पीछे स्थित कल्याण सागर सरोवर स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं को एक प्रकार के अलग और अदभुत आध्यात्मिक वातावरण का एहसास होता है। कछुए के आकार वाली एक छोटी-सी पहाड़ी पर बना माता का ये मंदिर, दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो किसी ने उस पहाड़ी को मुकुट पहना दिया है।

त्रिपुरसुंदरी माता के इस मंदिर के गर्भगृह में, माता की 2 प्रतिमाएं स्थापित हैं, जिसमें से एक प्रतिमा 5 फीट ऊंची प्रमुख प्रतिमाएं है, और दूसरी 2 फीट ऊंची बताई जाती है। बड़े आकार वाली प्रतिमा मुख्य रूप से त्रिपुरसुंदरी देवी के नाम से पूजी जाती है, जबकि छोटे आकार वाली प्रतिमा छोटी मां के नाम से पूजी जाती है।

गर्भगृह में माता की दो प्रतिमायों के विषय में बताया जाता है कि मंदिर के पीछे स्थित कल्याण सागर के सौंदर्यीकरण और निर्माण के लिए हुई खुदाई के दौरान ही उसमें से माता की यह छोटी वाली प्रतिमा प्रकट हुई थी, जिसके बाद उस प्रतिमा की स्थापना भी महाराजा ध्यान माणिक्य ने इसी मंदिर के गर्भगृह में करवा दी गई। संभवतः यही कारण है कि यहां दो प्रतिमायां स्थापित हैं।

माता की ये दोनों ही प्रतिमाएं काले ग्रेनाइट पत्थर से बनी हुई बताई जाती हैं।

श्री त्रिपुरसुंदरी शक्तिपीठ मंदिर कब जायें, कैसे जायें, कहां ठहरे? | Tripurasundari Shaktipeeth Temple?

Tripura Sundari Shaktipeeth Temple Tripura 3इसके अलावा यहां ये भी कहा जाता है कि युद्ध के दौरान, या फिर किसी भी अन्य काम से राजा ध्यान माणिक्य जब राजधानी से या राज्य से बाहर जाते थे तो वे इसमें से माता की छोटी प्रतिमा को हमेशा अपने साथ ले जाते थे, जबकि एक प्रतिमा मंदिर में ही स्थापित रहती थी।

श्री त्रिपुरसुंदरी देवी का ये शक्तिपीठ मंदिर देश के उन कुछ गिने-चुने मंदिरों में शामिल है जहां अब तक भी पशु बलि जैसी प्रथा बंद नहीं हो सकी है।

अपनी मन्नतें पूरी होने के बाद यहां कई श्रद्धालु आते हैं और मंदिर के प्रांगण में पशु बलि के रूप में बकरे और भैंसे की बलि चढ़वाते हैं। पशु बलि की ये प्रथा यहां साल के कुछ खास दिनों को छोड़ कर लगभग हर दिन देखी जा सकती है।

त्रिपुरसुंदरी देवी मंदिर के पीछे प्राचीन काल का पवित्र कल्याण सागर नाम का एक विशाल आकार वाला सरोवर भी है जो करीब छह एकड़ में फैला हुआ है। बताया जाता है कि इस सरोवर का जिर्णोद्धार और इसके घाटों का निर्माण भी मंदिर निर्माण के दौरान ही करवाया गया था।

त्रिपुरसुंदरी शक्तिपीठ मंदिर के गर्भ गृह में पुजारी के अलावा अन्य किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है। इसलिए यहां दूर से ही माता के दर्शन करने होते हैं।

प्रसाद के तौर पर माता को यहां पेड़े का प्रसाद सबसे अधिक चढ़ाया जाता है इसलिए यहां की ज्यादातर दूकानों में पेड़े का प्रसाद ही देखने को मिलता है।

माता त्रिपुरसुंदरी शक्तिपीठ मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक बताते है कि जब माता का यह मंदिर बन कर तैयार हो गया था तो उसमें परंपरागत और विधि-विधान से पूजा-पाठ करने वाले योग्य पुजारियों की कमी महसूह हुई। ऐसे में महाराजा ध्यान माणिक्य को किसी ने सलाह दी कि कन्नौज से कुछ योग्य पंडितों और पुजारियों को आमंत्रित किया जा सकता है।

राजा इस बात से सहमत हो गये और उन्होंने उत्तर भारत के कन्नौज राज्य से लक्ष्मी नारायण पांडे और गदाधर पांडे नाम के दो पंडितों को सपरिवार आमंत्रित किया और उन्हें उदयपुर में विशेष तौर पर बसाया गया। तब से लेकर आज तक भी उन्ही पुजारियों का परिवार, माता त्रिपुरसुंदरी के मंदिर में पूजा-पाठ करता आ रहा है। आज उन दो परिवारों का कुनबा यहां काफी बढ़ा हो चुका है और विशेष सम्मान के साथ रह रहा है।

About The Author

admin

See author's posts

Post navigation

Previous: मोर का लोककथाओं में महत्व | Peacock in Indian Folklore
Next: U-Turn Movie से मिली शिक्षा का सच और आत्माओं से मिलन का अनोखा सच

Related Stories

Sri Ayyappa Swami Temple in Kerala
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल
  • विशेष

अय्यप्पा स्वामी के नियम : आत्म संयम, समर्पण और भक्ति के प्रतीक

admin 14 January 2026
Sheetla Mata Temple in Gurugram_Ancient and Mughal history
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल
  • विशेष

शीतला माता मंदिर, गुरुग्राम की पौराणिक, प्राचीन और मुगलकालीन यात्रा

admin 26 September 2025
MARGHAT WALE HANUMAN MANDIR ka prachin itihas
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल
  • विशेष

मरघट वाले हनुमान मंदिर का पौराणिक, प्राचीन और मुग़लकालीन इतिहास

admin 19 September 2025

Trending News

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 1
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 2
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026
प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026
  • bharat barand‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • what nonsense is this - let them sayकभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • Bhavishya Malikaभविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

Recent Posts

  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!
  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.