रामपुर (यूपी)। ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती जी रामपुर जनपद में जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मन्त्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” के साथ गो रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया।
‘इस काम के लिए तो हमने आपको vote नहीं दिया था —
महाराजश्री ने जनसमुदाय से सीधा प्रश्न किया — क्या आपने इसीलिए vote दिया था कि जिसने vote लिया वही आपकी इच्छा के विरुद्ध गाय को काटे और बेचे? इसके लिए तो कोई vote नहीं देता, उन्होंने कहा। इसी पर लोग मौन रह जाते हैं, उन्होंने कहा, क्योंकि वे अपना vote पहले ही दे चुके हैं — और केन्द्र तथा राज्य में बैठी सरकार एक के बाद एक उनके विरुद्ध काम करती चली जा रही है। ‘यदि कोई एक भी काम आपके पक्ष में हुआ हो तो बता दीजिए,’ उन्होंने कहा — क्योंकि, उनके अनुसार, एक भी ऐसा काम नहीं हुआ, जबकि अनेक काम जनता के विरुद्ध हुए हैं। जिसे आप स्वयं पालते-पोसते हैं वही जब आपके विरुद्ध हो जाए, उन्होंने चेताया, तो बहुत-बहुत सावधान हो जाने की आवश्यकता है।
‘गोमाता पहला मुद्दा क्यों —
महाराजश्री ने बताया कि अनेक विषयों में से उन्होंने गोमाता के प्रश्न को पहले स्थान पर क्यों रखा। हर किसान के घर में, उन्होंने कहा, जब रोटी बनती है तो पहली रोटी किसी और की नहीं, गाय की ही होती है — गो-ग्रास। यही दैनिक परम्परा, उन्होंने कहा, इस बात का प्रमाण है कि हिन्दू के लिए गाय प्रथम प्राथमिकता है; इसीलिए सबसे पहला मुद्दा गोमाता और उसके सम्मान की रक्षा का ही उठाया जाना चाहिए।
‘अंग्रेजों ने 20,000 गायें काटीं, आज 80,000 कट रही हैं, यह हमारी संस्कृति है या उनकी’ —
महाराजश्री ने स्मरण कराया कि अंग्रेजों ने अपने सैनिकों के भोजन के लिए जो प्रथा थोपी, उसी के विरुद्ध जनता ने 1857 का आन्दोलन चलाया था। उनके समय में अंग्रेजों ने लगभग बीस हजार गायें काटीं, उन्होंने कहा; आज, उनके अनुसार, अस्सी हजार काटी जा रही हैं, और उन्होंने जनसमुदाय से पूछा कि अंग्रेजी संस्कृति क्या है और हमारी क्या। अंग्रेजों के समय का किया हुआ नुकसान भी, उन्होंने कहा, अब पार किया जा रहा है।
‘संकर नस्लें मिलाकर 17–18 करोड़ गिनाई जा रही, शुद्ध गायें एक-दो करोड़ रह गईं —
महाराजश्री ने कहा कि गाय के नाम पर जर्सी, संकर और विदेशी नस्लों को गिनती में मिला दिया गया, जिससे संख्या अब लगभग सत्रह-अठारह करोड़ दिखाई जाती है, जबकि शुद्ध देशी गायें घटकर केवल एक-दो करोड़ रह गई हैं — और इनमें से रोज अस्सी हजार कट रही हैं। ये कितने दिन चलेंगी, उन्होंने पूछा, और उसके बाद क्या? उसकी मूर्ति की पूजा और आरती तो की जा सकती है, उन्होंने कहा, किन्तु भूमि की उर्वर शक्ति तो गाय के गोबर और मूत्र से बनती है; उसके बिना भूमि बंजर हो जाती है, और यूरिया, DAP जैसे रासायनिक खाद उसे और तेजी से बंजरता की ओर खींच रहे हैं।
‘गाय बचेगी तो धर्म बचेगा, लेकिन गाय गई तो बचाने वाला कोई नहीं’ —
महाराजश्री ने कहा कि पेड़ों की कटाई और हरियाली के विनाश से धरती पहले ही मर रही है, और इसका परिणाम पूरा विश्व भोग रहा है। यह अन्तिम अवसर है, उन्होंने कहा: गाय को बचाओ, और गाय के माध्यम से अपने धर्म को बचाओ; और गाय के माध्यम से पूरे विश्व को बचाओ। हम गाय को माता इसीलिए कहते हैं, उन्होंने समझाया, क्योंकि जब तक वह रहेगी तब तक हम नष्ट नहीं हो सकते — और जिसकी माता नहीं रही उसे बचाने वाला कोई नहीं। गौमाता के समाप्त हो जाने के बाद, उन्होंने चेताया, आपको बचाने वाला कोई नहीं, क्योंकि माता ही बचाती है।
‘केवल महाराष्ट्र ने गाय को राज्य माता घोषित किया, फिर party ने उस मुख्यमन्त्री को हटाकर protocol चुपचाप दबा दिया’ —
महाराजश्री ने स्मरण कराया कि उन्होंने केन्द्र और राज्यों से गाय को माता घोषित करने को कहा; दस वर्ष तक नहीं माना गया। पूरे भारत में, उन्होंने कहा, केवल एक मुख्यमन्त्री — महाराष्ट्र के — ने प्रयास किया: उस सरकार ने गाय को पशु नहीं, माता के रूप में देखा, राज्य माता घोषित किया और protocol बनाया। उसके बाद हुआ चुनाव जीता गया; किन्तु, उनके अनुसार, party ने उस मुख्यमन्त्री को हटाकर दूसरे को बैठा दिया, जिसने गो राज्य माता का protocol चुपचाप रोक दिया — घोषणा कागज पर रह गई, प्रशासनिक प्रभाव शून्य।
‘भाजपा ने कभी नया गोरक्षा कानून नहीं बनाया बल्कि जम्मू-कश्मीर का दो सौ वर्ष पुराना कानून हटाने वाली एकमात्र party’ —
महाराजश्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे किसी party की ओर से नहीं, अपनी ही बात कह रहे हैं। जहाँ पहले कानून नहीं था वहाँ भाजपा ने कहीं भी नया गोरक्षा कानून नहीं बनाया, उन्होंने कहा — केवल पहले से बने कानूनों में फेरबदल कर अपना नाम बना लिया। और वही एकमात्र party है, उन्होंने आरोप लगाया, जिसने पहले से बना गोरक्षा कानून हटाया: जम्मू-कश्मीर में लगभग दो सौ वर्षों से कानून लागू था जिसमें गाय मारने पर दस वर्ष की सजा और एक किलो मांस रखने पर भी एक वर्ष की सजा थी — और भाजपा ने उसे हटाकर गोहत्या की खुली छूट दे दी, जो आज भी जारी है। जहाँ पहले कोई हिन्दू युवक पुलिस को बुला सकता था और पुलिस कार्यवाही करती थी, उन्होंने आरोप लगाया, वहाँ अब पुलिस सूचना देने वाले को ही पकड़ ले जाती है। और ‘गोदी media’ यह सब जनता से छिपाता है।
महाराजश्री ने आरोप लगाया कि गाय की रक्षा तो दूर, सरकार ने गोमांस के सेवन का प्रचार और उसका सामान्यीकरण करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह सब वे किसी party के विरोधी होकर नहीं, गोमाता के पक्षपाती होकर कह रहे हैं, क्योंकि यदि ऐसी व्यवस्था रही तो गाय की हत्या होती ही चली जाएगी। जनता को, उन्होंने आग्रह किया, अपने धर्म को जानना चाहिए, ताकि अपनी पहचान आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाई जा सके।
व्यक्तिगत मत सरकारी घोषणा नहीं होता –
“गाय माता तो है किन्तु घोषणा की आवश्यकता नहीं” — इसी मत पर महाराजश्री ने कहा कि घोषणा ही तो आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित जनों से हाथ उठवाकर गर्व और प्रसन्नता से घोषणा करवाई कि गाय उनकी माता है, और आने वाले चुनाव में वे केवल उसकी रक्षा के लिए मतदान करेंगे — व्यक्तिगत मत का कोई उपयोग नहीं, उन्होंने कहा, जबकि सरकार के अभिलेखों में गाय पशु दर्ज है; प्रश्न केवल यह है कि सरकार गाय को माता मानती है या पशु।
श्री धर्म देव गुप्ता जी विधानसभा प्रतिनिधि नियुक्त, एक नोट अभियान एवं अभिनव गोधाम —
सभा में श्री धर्म देव गुप्ता जी को स्थानीय समिति गठित कर विधानसभा क्षेत्र में एक नोट अभियान का संचालन करने हेतु नामित किया गया। महाराजश्री ने उन्हें एकत्रित राशि से एक भव्य-दिव्य गोधाम के निर्माण हेतु प्रतिनिधि नियुक्त किया और सबसे सहयोग का आह्वान किया, ताकि दूध देने के लिए नहीं बल्कि आशीर्वाद देने के लिए विराजमान विलक्षण गोमाता की कृपा इस विधानसभा क्षेत्र के हर घर तक पहुँचे।
सामूहिक संकल्प — चक्रधारी मुद्रा
महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई: “आज मैं बड़ी खुशी, प्रसन्नता और गर्व से घोषणा करता हूँ… कि गाय मेरी माता है। जो लोग मेरी गोमाता को पशु कहकर पुकार रहे हैं, मैं उनकी कड़ी निन्दा करता हूँ… मैंने संकल्प लिया है कि आने वाले चुनाव में अपनी गोमाता की रक्षा के लिए मतदान करूँगा। सभी पार्टियों और नेताओं से मेरा साफ सन्देश है — गोमाता को पशु सूची से हटाकर राज्य माता के रूप में दर्ज कराने के बाद ही मेरे दरवाजे मेरा vote लेने आना, अन्यथा स्वागत नहीं मिलेगा।”
तत्पश्चात् चक्रधारी मुद्रा में वैदिक संकल्प “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण कराया गया।
24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प —
3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारम्भ हुई गविष्ठि यात्रा अब 271 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों को पार करते हुए उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
मीडिया टीम
‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’
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