Tuesday, June 16, 2026
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तीर्थ हमारी सम्पत्ति हैं, इनके मूल रूप में कोई विकृति नही होना चाहिए : अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी

ज्योतिर्मठ | चमोली | 18 जून 2024 | ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य जी महाराज की “चमोली मंगलम्” यात्रा के चौथे दिन प्रातः बदरीनाथ धाम में प्रवास पर रहे, इस दौरान भगवद्भक्तों ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। शंकराचार्य जी महाराज ने अपने उपदेश में कहा कि हमारी विरासत और हमारी संस्कृति की रक्षा करना हमारा प्रथम कर्तव्य होना चाहिए।

बदरीनाथ धाम की मर्यादा बनाए रखते हुए ही विकास कार्य होना चाहिए –
बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान के विषय में पूछने पर शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि बदरीनाथ धाम में भगवान साक्षात विराजमान रहते हैं, अतः यहां के जो भी विकास कार्य हो उससे किसी भी तीर्थ, मन्दिर और परम्पराओं को कोई क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। कूर्म धारा और प्रह्लाद धारा की दयनीय स्थिति को लेकर उन्होने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि इन धाराओं के माध्यम से भगवान बदरीविशाल का सीधा आशीर्वाद भक्तों को मिलता था, ये धाराएं रुकी रहेंगी तो भगवान का आशीर्वाद हमें कैसे मिलेगा ? अपने कल्याण के लिए प्रशासन और सरकार को इस पर तत्काल ध्यान देकर इन धाराओं को निर्बाध रूप से बहने देना चाहिए।

शंकराचार्य जी महाराज ने इन मन्दिरों में भी दर्शन किया –
बदरीनाथ धाम से प्रस्थान करते हुए शंकराचार्य जी महाराज ने एकादशी गुफा में पूजा की, हनुमान चट्टी में हनुमान जी की आरती, पाण्डुकेश्वर स्थित श्री योग-ध्यान बदरी भगवान की पूजा अर्चना, विष्णुप्रयाग में गंगा पूजन, देव दर्शन करने के बाद नृसिंह मन्दिर परिसर में सभी देवी-देवताओं की पूजा अर्चना ज्योतिर्मठ पधारे जहां पर उपस्थित भक्तों ने स्वागत किया।

अन्य कार्यक्रम –
ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी तिथि के अवसर पर अखिलकोटिब्रह्माण्ड नायिका राजराजेश्वरी त्रिपुरसुन्दरी भगवती श्रीदेवी जी का पाटोत्सव मनाया गया, जिसमें श्रृंगार, विशाल भण्डारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न हुए। इसके अलावा भगवती के चरणों में गढवाल की लोक गायिका पूनम सती जी के द्वारा भजन भी प्रस्तुत किये गए तथा साथ ही अन्य अनेकों प्रस्तुतियां भी समर्पित की गई।
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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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