देश के तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दानराशि में गड़बड़ी के मामले की जांच के बीच अब मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में भी भारी कमी दर्ज की जा रही है। एक खबर के अनुसार, जहां पिछले कई महीनों से मंदिर में प्रतिमाह औसतन सात करोड़ रुपये के आसपास दान राशि प्राप्त हो रही थी, जबकि पिछले एक पखवाड़े में यह आंकड़ा घटकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक ही रह गया है। जबकि एक अन्य खबर के अनुसार दान राशि में लगभग 80% तक की गिरावट देखी जा रही है।
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान राशि से जुड़े गड़बड़ी प्रकरण के सामने आने और उसके बाद एसआईटी जांच शुरू होने के बाद से मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर देशभर में आम लोगों के बिच ही नहीं बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हुई है। भले ही मंदिर ट्रस्ट लगातार यह दावा कर रहा है कि दान संग्रह और उसकी गणना की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित एवं पारदर्शी है, लेकिन माना जा रहा है कि इस विवाद के कारण श्रद्धालुओं के एक वर्ग में सवाल भी उठे हैं कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है? और इसका सीधा असर दान और दर्शनार्थियों की संख्या पर पड़ने की चर्चा मंदिर परिसर और स्थानीय स्तर पर हो रही है।
एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रिपोर्टर के द्वारा जब अयोध्या में दक्षिण भारत से आए कुछ श्रद्धालुओं से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमें यह जानकर बहुत दुख हुआ कि भगवान राम के मंदिर को भी उन डाकुओं ने नहीं छोड़ा। इसी तरह जब गुजरात से आए एक परिवार से इस विषय पर पूछा गया तो उन्होंने बताया कि भगवान राम सब देख रहे हैं, चोर कौन है और किसने चोरी की यह भी समय आने पर निश्चित हो जाएगा। महाराष्ट्र से आए एक श्रद्धालु से जब दान-पात्र में हुई चोरी के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि इस प्रकार का पाप स्वधर्म तो कर ही नहीं सकते। अवश्य ही कोई विधर्मी होगा या फिर कालनेमी का रूप लेकर वह भगवान श्री राम के धन को खाली कर गया है। इसलिए, भगवान श्री राम के इस मंदिर प्रबंधन से जुड़े सभी लोगों के डीएनए भी चेक किए जाने चाहिए।
खबरों से पता चलता है कि बीते कुछ दिनों से दान राशि की गणना प्रक्रिया भी प्रभावित होती रही। इस माहौल को देखते हुए सामान्य दिनों की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या में भी कमी दर्ज की जा रही है, और इसका सीधा प्रभाव दानपात्रों में जमा होने वाली राशि पर देखा जा रहा है। जहां पहले श्रद्धालु अपनी सुरक्षा से दान पेटी में खुलकर दान दिया करते थे वहीं अब हुए उसे दान में कटौती करते हुए उसकी राशि को कम कर रहे हैं और यदि वे ₹100 चढ़ना चाहते थे तो आप मात्र 20-25 रुपए ही चढ़ाना पसंद कर रहे हैं। और उसके लिए वे मंदिर प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
लगभग एक सप्ताह पूर्व जब इसी राम मंदिर में रोजाना करीब एक लाख दर्शनार्थी आ रहे थे, वहीं पिछले तीन दिनों में यह संख्या घटकर 75 हजार हो चुकी है। प्राप्त खबरों के अनुसार, श्रद्धालुओं की इस गिरावट के चलते इस समय रोजाना करीब सात से आठ लाख का ही दान आ रहा है। खबरों के अनुसार, मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े एक कर्मी का कहना है कि केवल विवाद को ही दान में कमी का कारण नहीं माना जा सकता। क्योंकि भीषण गर्मी, स्कूल-कॉलेजों के खुलने, विवाह सीजन समाप्त होने और यात्रा के सामान्य चक्र का भी असर श्रद्धालुओं की संख्या पर पड़ा है।
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