हो सकता है कि जाबूझकर सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में कुछ इस प्रकार की गलतियां की जाती हों, ताकि जो परिवार अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं और जो आर्थिक तौर पर सक्षम भी है वे इन सरकारी स्कूलों से मुंह मोड़ ले और आसपास के बड़े और ब्रांडेड यानी बड़े निजी स्कूलों में दौड़-भाग करते नजर आए और वहां अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा भरते जाए। क्योंकि कमाई से ज्यादा बच्चों का भविष्य मायने रखता है। और सरकारी यह बात अच्छे से जानती है कि कैसे लोगों को भ्रमित किया जाए। यानी बिना विज्ञापन के भी आप कस्टमर को कैसे अपनी और आकर्षित कर सकते हैं ये आधुनिक शिक्षा में नया मैनेजमेंट सिस्टम कहलाता है।
दरअसल, खबर ये है कि ओडिशा के सरकारी स्कूलों में नई किताबों में बड़ी संख्या में गलतियां मिलने से शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में आ गया है। 2026-27 सत्र के लिए कक्षा 1 से 8 तक की किताबों में 1,678 वर्तनी, तथ्य और जानकारी से जुड़ी गलतियां पाई गई हैं। ये किताबें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के तहत तैयार की गई थीं। स्कूलों में किताबें पहुंचने के बाद शिक्षकों ने इनमें कई गंभीर गलतियां देखीं और इसकी जानकारी विभाग को दी।
8वीं की पुस्तकों में 705 गलतियां –
बताया जा रहा है की सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम के कक्षा 8 की पुस्तकों में सबसे ज्यादा 705 गलतियां पाई गई हैं। इनमें प्रसिद्ध व्यक्तियों के नामों में ही कई त्रुटियां हैं जिसके अनुसार, गलत तस्वीरें और तथ्यात्मक गलतियां शामिल हैं। मामले के सामने आने के बाद से स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग ने सभी त्रुटियों को स्वीकार किया है और सुधारों की सूची तैयार की है। जबकि छात्रों की पढ़ाई पर असर कम करने के लिए स्कूलों को संशोधन सूची यानि कोरिजेंडम भी जारी कर दी गई है।
सीएम ने दिए जांच के आदेश –
उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 17 जून को लोक सेवा भवन में इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई थी, जिसमें स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड, मुख्य सचिव अनु गर्ग और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने सभी गलतियों को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए और कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए।
उन्होंने विकास आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति के गठन की भी घोषणा की। यह समिति जांच करेगी कि पाठ्यपुस्तकों में हुई इन गंभीर गलतियों के लिए कौन अधिकारी या संस्थान जिम्मेदार हैं। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भविष्य में प्रकाशित होने वाली सभी शैक्षणिक सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और पुस्तक तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक किताब में महान वैज्ञानिक आइज़ैक न्यूटन को “महान पायलट” बताया गया है। इसके अलावा कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर को ओडिशा विधानसभा और हम्पी मंदिर की तस्वीर को कोणार्क सूर्य मंदिर बताकर छापा गया है। इतनी बड़ी संख्या में गलतियां सामने आने के बाद किताबों की गुणवत्ता और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। अब शिक्षा विभाग इन गलतियों को सुधारने की तैयारी कर रहा है।
