Skip to content
9 April 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • पर्यावरण
  • स्वास्थ्य

प्रकृति से एकाकार होने का आनन्द | Enjoyment with Nature

admin 22 January 2022
Enjoyment with Nature
Spread the love

अगर आप किसी बहुत पुराने जंगल में जाएं, जहां बहुत ही कम मनुष्य गए हों, तो ऐसे जंगल में जाकर आप बस अपनी आंखें बंद करके बैठ जाइए, आपको लगेगा कि आप किसी मंदिर में बैठे हुए हैं। आप प्रत्यक्ष इस बात को महसूस कर सकते हैं। वहां ऊर्जा की असाधारण मात्रा आपको सहारा देती है, क्योंकि जीवन की इस पूरी प्रक्रिया में, जीवाणु से लेकर कृमि तक, कीड़े-मकोड़ों से लेकर पशु-पक्षी तक, पेड़-पौधे, सबका यही इरादा रहता है कि वर्तमान में जिस भी रूप में हैं, उससे कुछ अधिक बनना है। यह उद्देश्य अपने आप में एक पवित्र स्थान की स्थापना करता है, यह अपने आप में एक तरह की पवित्रता पैदा कर देता है। अगर आप धरती को बस वैसे ही रहने दें, जैसी यह थी और बस यहां पर बैठें या सोएं, तो आप पाएंगे कि यह पूरा स्थान एक पवित्र स्थान बन गया है।

प्रतिष्ठित रूपों या प्रतिष्ठित स्थानों जैसे मंदिरों के निर्माण की जरूरत इसलिए होती है क्योंकि मानव समाज में उद्देश्यों के अलग-अलग बेसुरे राग देखने को मिलते हैं। एक ही घर में पति और पत्नी के उद्देश्य अलग-अलग होते हैं। दोनों जीवनसाथी होते हैं और दोनों का एक सामान्य उद्देश्य हो सकता है लेकिन उनके भी सभी उद्देश्य भिन्न होते हैं, यह इरादों का बेसुरापन होता है। इसके कारण किसी के पास महसूस करने के लिए गुंजाइश ही नहीं होती। एक प्रतिष्ठित या पवित्र स्थान मूल रूप से एक तैयार की गई स्थिति होती है, जो जीवन की स्वाभाविक लालसा को सामने लाती है।

पेड़ हमारे फेफड़ों के बाहरी हिस्से की तरह हैं। अगर आप जीना चाहते हैं तो अपने शरीर की अनदेखी नहीं कर सकते। यह धरती भी इसका अपवाद नहीं है। आप जिसे ‘ मेरा शरीर’ कहते हैं, वह दरअसल इसी धरती का एक हिस्सा है।

जब हम आध्यात्मिकता की बात करते हैं, तो उसका आशय ऊपर देखने या नीचे देखने से नहीं है। इसका आशय अपने भीतर देखने से है। अपने भीतर देखने का पहला मूलभूत सिद्धांत है कि भीतर मुड़ते ही आप हमेशा अपने आप को अपने आसपास की चीजों के हिस्से के तौर पर देखना शुरू कर देते हैं। इसकी अनुभूति हुए बिना आध्यात्मिक प्रक्रिया की शुरुआत नहीं हो सकती। यह अनुभूति आध्यात्मिकता का लक्ष्य नहीं है, बल्कि उसकी बुनियाद है।

Rishi, Muni, Sadhu, Sanyasi : क्या हैं ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी ?

हमारे लिए एक जिंदा पेड़ की कीमत ज्यादा है या कटे पेड़ की? भारत के पर्यावरण और वन मंत्रलय द्वारा कराये गए एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया कि 50 वर्ष पुराने एक पेड़ को अगर उसकी लकड़ी के लिए काटा जाए, तो वह करीब 50,000 रुपये (900 डाॅलर) मूल्य का होता है, लेकिन अगर उसे छोड़ दिया जाए, तो वह जो पर्यावरण संबंधी सेवाएं देता है उसकी कीमत लगभग 23 लाख रुपये (40,000 डाॅलर) के बराबर होगी।

इन सेवाओं का ब्यौरा देखते हैं:
– 50 सालों में दिया गया आॅक्सीजन- 3,50,000 रुपये (6300 डाॅलर)
– जल के पुनर्चक्रण (रिसाइकलिंग) संबंधी सेवाएं- 4,50,000 रुपये (8100 डाॅलर)
– मिट्टी का संरक्षण-3,75,000 रुपये (6750 डाॅलर)
– प्रदूषण नियंत्रण-7,50,000 रुपये (12,500 डाॅलर)
– पशु-पक्षियों को मिला आश्रय-3,75,000 रुपये (6750 डाॅलर)
– संक्षेप में देखें तो एक कटा हुआ पेड़ =50,000 रुपये (900 डाॅलर)
– एक जीवित पेड़ =23 लाख रुपये (40,000 डाॅलर) मूल्य का होता है।

जब आप ‘लुप्तप्राय’ शब्द सुनते हैं, तो आपका ध्यान जानवरों की ओर जाता है। वर्तमान समय में जंतुओं की 10820 प्रजातियां संकटग्रस्त मानी गई हैं। लेकिन यह याद रखना भी महत्त्वपूर्ण है कि लुप्त होने का खतरा पौधों पर भी मंडराता है। पौधों की 9390 किस्मों को भी लुप्तप्राय माना गया है। सिर्फ भारत में ही पेड़ों की 60 प्रजातियों को अत्यंत संकटग्रस्त और 141 प्रजातियों को संकटग्रस्त माना गया है।

MEDITATION : सांस ही बंधन, सांस ही मुक्ति

किसी एक व्यक्ति का हमारे पर्यावरण पर क्या असर होता है, इसे नापने के लिए वैज्ञानिकों ने कार्बन फुटप्रिंट नाम का सिद्धांत दिया है। करीब-करीब वे सारे काम जो हम रोजाना करते हैं या हम जिन भी साधनों का इस्तेमाल करते हैं, उन सब से कार्बन डाई आॅक्साइड (ब्व्2) निकलती है। औद्योगिक क्रांति से पहले मनुष्यों द्वारा पैदा की गयी जितना भी कार्बन डाई आॅक्साइड वातावरण में आती थी, वह आस-पास के पेड़-पौधों द्वारा सोख ली जाती थी। जंगल व पेड़- पौधे कार्बन डाई आॅक्साइड को सोख कर आक्सीजन को वापस हवा में छोड़ देते हैं और वे कार्बन को अपने भीतर जमा कर लेते हैं।

औद्योगिक युग के शुरुआत के साथ ही ईधन का प्रयोग बड़े पैमाने पर होने लगा जिससे कार्बन डाई आक्साइड भारी मात्रा में निकलने लगी । साथ ही, बढ़ती आबादी का पेट भरने के लिए खेती के लिए बड़े पैमाने पर जंगल काटे गए, जो कार्बन सोखने का काम करते थे। आज स्थिति यह है कि जितनी कार्बन डाई आॅक्साइड वातावरण में पैदा होती है, उसे सोखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पेड़ ही नहीं बचे हैं।

जैसे-जैसे आप प्रकृति के अधिक से अधिक नजदीक होते हैं और पूरी तरह प्रकृति की गोद में रहते हैं, तो आप चीजों को जैसे महसूस करते हैं वह बिल्कुल अलग होता है, आपकी उस समझ से जो फिल्मों या तस्वीर के माध्यम से आप हासिल करते हैं। यही वजह है कि योगी हमेशा जंगलों और पहाड़ी गुफाओं में जाकर रहते थे, क्योंकि सिर्फ वहां बैठने से प्रकृति का उद्देश्य आपके सामने पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है। मुख्य बात है, उन सभी सीमाओं के परे विकास करना, जो अभी आपको बांधे हुए हैं। यह उद्देश्य वहां की मिट्टी के एक-एक कण से अभिव्यक्त होता है, इसलिए यह मौका न चूकें। अगर आप उद्देश्यहीन हो जाएं, तो आप अस्तित्व का उद्देश्य महसूस करेंगे। जब आप उसके साथ एकाकार हो जाते हैं, तो आप उस दिशा में बहुत आसानी से सफर कर सकेंगे।

– डाॅ. पी आर त्रिवेदी

About The Author

admin

See author's posts

1,155

Post navigation

Previous: Bharat Ratna : क्या है भारत रत्न: सर्वोच्च नागरिक सम्मान
Next: Great Teachers : हमारे 10 महान गुरु

Related Stories

National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

admin 15 March 2026
Solar energy plants in desert of India
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

admin 13 March 2026
Polluted drinking water in India
  • पर्यावरण
  • भ्रष्टाचार
  • विशेष
  • स्वास्थ्य

UP में प्रदूषित जल से सावधान!

admin 4 March 2026

Trending News

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 1
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 2
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026
प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026

Total Visitor

096047
Total views : 176447

Recent Posts

  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!
  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.