मध्यप्रदेश की आस्तिक जनता की गणेशजी में बड़ी आस्था है । स्थान-स्थान पर श्रीगणेश के दर्शनीय स्थल हैं। पं० श्रीनाथशंकरजी शुक्ल, श्रीमोहरेजी, श्रीनारायणाश्रम- स्वामीजी आदि से प्राप्त विवरण तथा अन्य सूत्रों के आधार पर यहाँ के गणेश स्थानों की अल्प झलक प्रस्तुत की जा रही है।
खोड़ – शिवपुरी के पास खोड़ग्राम में धाय- महादेव का प्रसिद्ध मन्दिर है। यह मूर्ति एक धाय- वृक्ष के नीचे भूमि में पायी गयी थी, इसी से इन्हें ‘धाय – महादेव’ कहते हैं। इस मन्दिर का स्थान तीन ओर उमंग नदी से घिरा हुआ है। मुख्य मन्दिर के सामने गणेशजी की मूर्ति है।
उज्जैन- द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अत्यन्त प्रसिद्ध महाकाललिंग यहीं है और महाकालका मन्दिर ही उज्जैन का प्रधान मन्दिर है। महाकालेश्वर की विशाल लिंग – मूर्ति के एक ओर गणेशजी हैं, दूसरी ओर पार्वती और तीसरी ओर स्वामिकार्तिक। महाकाल – मन्दिर के पास ही बड़े गणेशका मन्दिर है। यह मूर्ति यद्यपि है तो आधुनिक, किंतु बहुत बड़ी और अत्यन्त सुन्दर है। यहाँ के षट्-विनायक के मन्दिर इस प्रकार स्थित हैं- १- मोदविनायक – महाकालेश्वर के मन्दिर में कोटितीर्थ पर इमली के नीचे। २- प्रमोदविनायक (लड्डूविनायक) – विराट् हनुमान के पास रामघाट पर। ३-सुमुखविनायक (स्थिरविनायक या थल – महागणपति ) – गढ़कालिका के मन्दिर के पीछे। ४-दुर्मुखविनायक – मंगलनाथ की सड़क पर खाकयो के अखाड़े के पीछे अंकपाद (चित्रगुप्तमार्ग) – की सड़क के पास। ५- अविघ्न विनायक – खाकयो के अखाड़े के सामने है, तथा ६-विघ्नविनायक – (विघ्नकर्ता-) चिन्तामणि गणेश-मन्दिर स्टेशन के पास बहुत प्रसिद्ध है। इन षट्-विनायकों के पूजन आदि का बड़ा महत्त्व है।
यहाँ एक गणेश-तीर्थ भी है, जो पूजाभिषेक के लिये रामभ्राता श्रीलक्ष्मणजी द्वारा स्थापित किया गया माना जाता है। इसके अलावा उज्जैन में और भी कई प्रसिद्ध गणेश मन्दिर हैं।
चिन्तामनगणपति – यह स्थान उज्जैन से चार किलोमीटर की दूरीपर स्थित है । यहाँ गणेशजी का पुराना मन्दिर है, जो अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित है। यहाँ पर चैत्र महीने के हर बुधवार को यात्रा लगती है।
नवगढ़ – (गोडवानी ) – श्रीतात्याजी विश्वम्भरपंत मोहरेजी ने इस मन्दिर का निर्माण करवाया। यह मन्दिर बहुत पुराना है। इसमें श्रीगणेशजी की एक बड़ी भव्य सिद्धिदायक मूर्ति है। इसी मन्दिर में एक किनारे पर श्रीकृष्ण-राधा-रुक्मिणी की तथा अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं । मन्दिर के सामने एक बड़ा शमी वृक्ष है, जिसकी पत्तियाँ गणेशजी की पूजाके काम में आती हैं।
अमरकण्टक – शोण-नर्मदा के उद्गमस्थल अमर- कण्टक के गहन वन में महर्षि भृगु का आश्रम है। यहाँ सिद्धविनायक की भव्य द्विभुज मूर्ति है। इनके दाहिने- बायें ऋद्धि-सिद्धि अवस्थित हैं। मूर्ति सजीव-जैसी लगती है।
ओंकारेश्वर – अजमेर – खण्डवा – लाइन पर ओंकारेश्वर रोड स्टेशन है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ओंकारेश्वर की भी गणना है। श्रीओंकारेश्वर की मूर्ति अनगढ़ है। यह मूर्ति मन्दिर के ठीक शिखर के नीचे न होकर एक ओर हटकर है। मूर्ति के चारों ओर जल भरा रहता है। पास में ही पार्वतीजी की मूर्ति है । मन्दिर के हाते में पंचमुख गणेशजी की मूर्ति है।
पगारा – माण्डवगढ़ से नर्मदा-प्रवाह के ऊपर की ओर दस मील दूर यह स्थान है। यहाँ वक्रतुण्ड गणेशजी का मन्दिर है।
राजघाट – चिखलदा के सामने नर्मदा के दक्षिण तटपर बड़वानी नगर से यह स्थान तीन मील दूर है। यहाँ अनेकों मन्दिर हैं, जिनमें भगवान् गणपति का मन्दिर मुख्य और भव्य है।
लोणार – मेहकर से लोणार पंद्रह मील दूर है। यहाँ हाथी की सूँड़ के समान एक प्रपात एक कुण्ड में गिरता है। इस पवित्र कुण्ड में उतरने के लिये सीढ़ियाँ बनी हैं। पास ही गणेशजी तथा अन्य देवी-देवताओं के बड़े दर्शनीय मन्दिर हैं।
इन्दौर – यहाँ बारह फीट ऊँची विशाल गणेशमूर्ति है। तल रंगसे रँगी मूर्ति बड़ी सुन्दर लगती है।
निष्कलंकेश्वर गणेश – उज्जैन के पास निष्कलंकेश्वर महादेव के मन्दिर के प्रवेशद्वार में ही यह गणेशमूर्ति है।
– गणेश अंक से
