Monday, June 22, 2026
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फ्रांस की हिंसा से संपूर्ण यूरोप की सांसे थमी, ब्रिटेन में डर का माहौल

पिछले कुछ दिनों से फ्रांस में जिस प्रकार से हिंसक प्रदर्शन चल रहे हैं दुनिया अब उनसे अनजान नहीं है। इन हिंसक प्रदर्शनों का कारण और उसके पीछे के मकसद को दुनिया समझने लगी है। एक विशेष समुदाय की उग्र भीड़ और उसके उग्र प्रदर्शनों ने जिस तरीके से अनियंत्रित रूप ले रखा है और सामने आने वाली किसी भी प्रकार की सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को निशाना बना रही है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि राष्ट्रवाद और सेक्युलरवाद का अब फ्रांस में कोई महत्व नहीं रह गया है। इन हिंसक प्रदर्शनों के कारण आज न सिर्फ सेक्युलरवाद के सबसे बड़े चैंपियन फ्रांस की सांसे अटकी हुई हैं बल्कि संपूर्ण यूरोप भी अब सांसे थाम कर बैठा है कि अब आगे क्या होने वाला है यह कोई नहीं जानता।

दुनियाभर के जानकार अब इस बात को मान रहे हैं कि फ्रांस के ताजा हालातों और उग्र भीड़ द्वारा अनियंत्रित तरीके से कहीं भी किसी भी स्थान पर हमला करते देख यूरोप के ही नहीं बल्कि दुनिया के करीब-करीब सभी छोटे-बड़े देश और विशेषकर ब्रिटेन में भी अब डर का विशेष माहौल बन चुका है। भले ही यूरोप इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहा है लेकिन, सच तो यही है कि यूरोप का भविष्य अब मुल निवासियों के हाथों में नहीं बल्कि उसके शरणार्थियों के हाथों में जाता दिख रहा है। यूरोप से आने वाली खबरों को आधार माने तो अब इस बात का खुलासा होता जा रहा है कि संपूर्ण यूरोप में डर का माहौल बन चुका है।

FRANCE VIOLANCE IN J2023
उधर बीबीसी की खबरों को आधार माने तो फ्रांस के प्रदर्शनों और हिंसा की आग अब इसके पड़ोसी देश बेल्जियम तक भी पहुंच चुकी है और वहां भी प्रदर्शन होने शुरू हो चुके हैं।

यूरोप के सबसे प्रमुख देशों में से एक ब्रिटेन में जहां इस समुदाय की आबादी का करीब 6.3 प्रतिशत भाग रहता है वह भी इस समय भयंकर तरीके से डरा हुआ है। जबकि, उधर पड़ोसी देश जर्मनी के पूर्व नेताओं और अन्य कई लोगों ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि हमने सैक्युलरवाद के नाम पर एक विशेष समुदाय को शरण और संरक्षण देने और उसे बढ़ावा देने की बहुत बड़ी गलती कर दी और वही गलती अब संपूर्ण यूरोप के लिए गले की हड्डी बनती जा रही है।

जर्मनी के क्लिनीकम न्यूर्नबर्ग हॉस्पिटल के एक चिकित्सक प्रोफेसर एन. जॉन ने तो ट्वीट कर यहाँ तक कह दिया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यहाँ सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है। जर्मनी के कई प्रमुख लोगों और नेताओं ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि फ्रांस की इस हिंसा से साबित होता है कि अब्राहमिक और इस्लामिक धर्म, विचारधारा और संस्कृति एक साथ कभी नहीं रह सकती। जर्मनी के इस डर का कारण यही है कि उसकी आबादी में भी इस समुदाय की करीब 6.1 प्रतिशत भागीदारी है।

उधर बीबीसी की खबरों को आधार माने तो फ्रांस के प्रदर्शनों और हिंसा की आग अब इसके पड़ोसी देश बेल्जियम तक भी पहुंच चुकी है और वहां भी प्रदर्शन होने शुरू हो चुके हैं। बेल्जियम में मुस्लिम आबादी करीब 7.6 प्रतिशत है जबकि फ्रांस में यह प्रतिशत 8.8 है। इसलिए डर इस बात का है कि यदि बेल्जियम में भी इनके प्रदर्शन उग्र रूप ले लेते हैं तो उसका अंजाम क्या होने वाला है कोई नहीं जानता। क्योंकि फ्रांस और बेल्जियम जैसे दोनों ही देशों की मुस्लिम आबादी का प्रतिशत करीब-करीब एक बराबर है।

हालांकि, जानकार मानते हैं कि साइप्रस में यह आबादी करीब 25.4 प्रतिशत है जो कि संपूर्ण यूरोपिय देशों में सबसे अधिक है और इसके अलावा बुल्गारिया जैसे यूरोपिय देश में भी दूसरी सबसे अधिक यानी करीब 11.1 प्रतिशत है वहां फिलहाल शांति है। लेकिन, डर इस बात का है कि यदि इन देशों में भी प्रदर्शन होते हैं और वे प्रदर्शन हिंसक रूप ले लेते हैं तो इसका असर संपूर्ण यूरोप पर एक साथ पड़ सकता है और उसके बाद यूरोप के मूल धर्म और मूल निवासियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।

उधर, अकेले ब्रिटेन की ही बात करें तो प्राप्त खबरों के अनुसार ब्रिटिश सरकार ने देश के किसी भी हिस्से में होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर नजर रखने और उनको नियंत्रित करने या कुचलने के लिए पुलिस को न सिर्फ खुली छूट दे दी है बल्कि कुछ विशेष अधिकार भी दे दिये हैं। पुलिस को प्राप्त उन विशेष अधिकारों के बाद पुलिस अधिकारियों ने देश के कई व्यस्त राजमार्गों और सड़कों के किनारे पहले से ही चल रहे कुछ विरोध प्रदर्शनों जैसे जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ‘जस्ट स्टाप ऑयल’ (Just Stop Oil) और ‘एक्सटिंक्शन रिबेलियन’ (Extinction Rebellion) सहित अन्य कई प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दे दी है।

ब्रिटेन में पिछले कुछ वर्षों से लगातार चल रहे ऐसे ही अन्य कई प्रकार के छोटे-बड़े प्रदर्शनों के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है और पुलिस कुछ खास नहीं कर पा रही थी। लेकिन, अब फ्रांस के हिंसक हालातों को देखते हुए जब से उसे विशेष अधिकार और शक्तियां प्राप्त हुई हैं तब से ब्रिटेन की पुलिस अचानक हरकत में आ चुकी है और किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शनों पर काबू पाने के लिए इसी रविवार से शक्तियां करनी शुरू कर दी है। हालांकि कुछ आलोचकों ने इसका विरोध भी किया है लेकिन, अधिकारियों का कहना है कि हमारे इन उपयों से हम, न सिर्फ लोगों की परेशानी को दूर कर सकेंगे बल्कि भविष्य के खतरों से भी सुरक्षित रह पायेंगे।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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