Skip to content
1 May 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • षड़यंत्र
  • सम्प्रदायवाद

यह हरिहर मस्जिद है या हरिहर मंदिर? | History of Sambhal

admin 6 December 2021
Harihar Masjid in Sambhal
Spread the love

देश की राजधानी दिल्ली से करीब 190 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश में स्थित सम्भल भले ही किसी समय में भगवान शिव की नगरी और सनातन धर्म के लिए एक पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ रहा हो। लेकिन, वर्तमान में यह एक घनी मुस्लिम आबादी वाला क्षेत्र बन चुका है। इसी प्रकार से तमाम इतिहासकारों और उनके दस्तावेजों से ज्ञात होता है कि सम्भल में स्थित एक प्रसिद्ध मस्जिद को आज भले ही जामा मस्जिद के नाम से जाना जाता है, लेकिन वास्वत में वह एक ऐसा मंदिर हुआ करता था जिसका जिक्र और अस्तित्व हमारे पौराणिक ग्रंथों में हरिहर मंदिर के नाम से आज भी मौजूद है।

इतिहास, इतिहासकारों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर सुदर्शन न्यूज के संपादक और मालिक सुरेश चव्हाण के. ने भी अपने एक कार्यक्रम में संभल की इस जामा मस्जिद के कई पहलुओं को उजागर किया और बताया कि किस प्रकार से इससे जुड़े इतिहास को दबाने का प्रयास किया गया और कैसे आज वहां इसे एक मजहब विशेष ने अपना लिया है।

संभल में स्थित हिन्दुओं की आस्था का प्रतिक हरिहर मंदिर कब और कैसे एक मस्जिद में परिवतर्तित हो गया इस बात की जानकारी के तौर पर हम अगर इतिहास में जाएं तो पता चलता है कि इसको बचाने के लिए वैसे तो कई बार हिंदू राजाओं और मुस्लिम आक्रांताओं के बीच छोटे-बड़े युद्ध हुए, लेकिन जो सबसे निर्णायक युद्ध हुआ वह था अफगान से आये मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान बीच का एक भीषण युद्ध। जिसमें मोहम्मद गौरी ने जीत हासिल की और इसे अपने कब्जे में ले लिया। ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि इस युद्ध में और उसके बाद भी मंदिर के अस्तित्व को बचाने के लिए लाखों हिंदुओं ने अपना बलिदान दिया।

बताया जाता है कि मोहम्मद गौरी ने इसी सम्भल और यहां के हरिहर मंदिर को जीतने और लूटने के लिए 17 बार लड़ाईयां लड़ी थीं। लेकिन, जब मोहम्मद गौरी इसके बाद भी सफल नहीं हो सका तो उसने पृथ्वीराज चौहान की ताकत को कम करने के लिए उसके सहायक राजाओं और अन्य राज्यों को कमजोर करना शुरू कर दिया। और जब पृथ्वीराज चौहान के सहायक राजा कमजोर होने लगे तो उसका फायदा उठाकर मौहम्मद गौरी ने 17वीं बार में पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया। पृथ्वीराज चौहान सम्भल के उस 17वें युद्ध में परास्त हो गए थे।

पृथ्वीराज चौहान की हार होते ही मोहम्मद गौरी की लुटैरी सेना ने सम्भल के सबसे प्रमुख और सबसे समृद्धशाली हरिहर मंदिर सहित अन्य कई मंदिरों में भारी लूटपाट की और मूर्तियों को भी खंडित कर दिया। इस दौरान उसने हरिहर मंदिर के गर्भगृह को पूरी तरह से तहस-नहस करवा कर ध्वस्त करवा दिया और उस स्थान पर सनातनियों का प्रवेश भी रोक दिया।

उन मुगल आक्रमणकारियों को इस बात का अंदेशा था कि सनातन के लिए सम्भल का बहुत बड़ा महत्व है इसलिए भविष्य में इस्लाम के लिये यह स्थान हानिकारक हो सकता है। इसलिए, उन लोगों ने यहां भारी संख्या में हिंदू समुदाय का धर्म परिवर्तन करवाना शुरू कर दिया और जो लोग धर्म परिवर्तन से बचते थे उन हिंदूओं का कत्लेआम करना शुरू कर दिया।

हैदराबाद का प्राचीन इतिहास और भागमती का भ्रम | Ancient history of Hyderabad

इसके अलावा भी सम्भल ने अपने इतिहास में न जाने कितने ही छोटे-बड़े युद्ध देखे और अपमानों को झेला है। शेरशाह सूरी और बाबर के शासनकाल के दौरान भी सम्भल में कई मन्दिरों को तोड़ा और मूर्तियों को खण्डित किया गया।

जानकार मानते हैं कि पृथ्वीराज चौहान के शासन काल तक सम्भल शहर के बिचोंबिच सनातन धर्म और अखण्ड भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक और पौराणिक युग का जो हरिहर मंदिर हुआ करता था, वही मंदिर अब यहां जामा मस्जिद के नाम से जाना जाता है।

इतिहासकारों, जानकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार मौहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को परास्त कर संभल के जिस हरिहर मंदिर को नष्ट कर दिया था और उसके स्थान पर जिस मस्जिद का ढांचा खड़ा करवा दिया था उस मस्जिद के अंदर आज भी उसी हरिहर मंदिर के वे अवशेष इसलिए मौजूद हैं क्योंकि उस मंदिर को पूरी तरह से नष्ट नहीं किया गया था। बल्कि, उस मंदिर की मुख्य इमारत के मात्र शिखर को ही तोड़ कर उसके ऊपर गुम्बद बनाकर उसको मस्जिद का आकार दे दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सम्भल की इस मस्जिद में आज भी ऐसे अवशेष देखने को मिलते हैं जिनसे यह सिद्ध होता है कि यहां पौराणिक काल का कोई मंदिर हुआ करता था और उसमें पूजा-पाठ होती आ रही थी। यही कारण है कि संभल की इस जामा मस्जिद को यहां के हिन्दू समाज के लोग आज भी हरिहर मंदिर कह कर ही संबोधित करते हैं। जबकि इससे भी बड़े आश्चर्य की बात तो यह है कि यहां के मुस्लिम समाज में भी यह मस्जिद हरिहर मस्जिद के नाम से जानी जाती है।

पाटन देवी शक्तिपीठ मंदिर यात्रा की संपूर्ण जानकारी | Patan Devi Shaktipeeth Balrampur UP

दरअसल, जब पृथ्वीराज चौहान के मित्र और महामंत्री चंदबरदाई ने जब पृथ्वीराज चौहान को बताया कि शास्त्रों के अनुसार संभल नामक इसी स्थान पर भगवान विष्णु का अवतार होने वाला है, तब पृथ्वीराज चौहान ने इस स्थान को अखण्ड भारत का एक धार्मिक और पर्यटन स्थल बना कर यहां अन्य अनेकों प्रकार के विकास कार्य किये। जिसमें सबसे प्रमुख हरिहर मंदिर का जिर्णोद्वार सहीत अन्य अनेकों प्रकार के कुएं और तालाबों का निर्माण करवाया। इसके अलावा पृथ्वीराज चौहान ने इसको सैन्य छावनी बनाकर सम्भल को अपने राज्य की एक छोटी राजधानी के तौर पर भी दर्जा दिया था।

पृथ्वीराज चौहान के बाद जब अखंड भारत पर मुगलों के आक्रमणों का दौर चल रहा था उस समय से लेकर देश की आजादी तक भी सम्भल को सामरिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता रहा। आगरा व दिल्ली के निकट होने के कारण यहां कई प्रकार की सामरिक और राजनैतिक षड्यंत्रों की उथल-पुथल मची हुई रहती थी। ऐसे में हर राजा और राज्य के लिए सम्भल का सामरिक महत्व बढ़ जाता था।

सम्भल के लोगों का कहना है कि कुछ तो स्थानीय लोगों ने और कुछ यहां के स्थानीय प्रशासन और प्रदेश की सरकारों ने यहां की कई ऐतिहासिक और पौराणिककाल की अपनी ही धरोहरों को संवारने के प्रति उदासीनता और लापरवाही को उजागर किया है। जबकि आज भी यह क्षेत्र पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के रूप में प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में बदल सकता है।

– अजय सिंह चौहान

About The Author

admin

See author's posts

Post navigation

Previous: मां दुगा जी की आरती – जय अम्बे गौरी…
Next: श्री हरसिद्धि माता शक्तिपीठ मंदिर की संपूर्ण जानकारी | Harshidhi Shaktipeeth Ujjain

Related Stories

World Economic Forum meeting in Davos 2024
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

admin 13 March 2026
UP Lucknow food safety news
  • अपराध
  • भ्रष्टाचार
  • विशेष
  • षड़यंत्र
  • स्वास्थ्य

मिलावटखोर प्रदेश (Uttar Pradesh) का हाल बेहाल!

admin 4 March 2026
Shankaracharya Ji asked the government to free the grazing land immediately - Bhagalpur Bihar
  • विशेष
  • षड़यंत्र

साजिशकर्ता और न्यूज़ चैनल के झूठ का पर्दाफाश!

admin 27 February 2026

Trending News

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys! Men was not monkey 1
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!

1 May 2026
नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा Noida Protest Illegal Detention 2
  • देश
  • विशेष

नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा

29 April 2026
‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 3
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 4
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026

Tags

नोएडा मीडिया क्लब नोएडा सिटीजन फोरम भाजपा सरकार योगी सरकार सीएम योगी
  • Men was not monkeyसुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!
  • Noida Protest Illegal Detentionनोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा
  • bharat barand‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

Recent Posts

  • सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!
  • नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा
  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.