Skip to content
14 March 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • अध्यात्म
  • भाषा-साहित्य
  • विशेष

वैदिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र था श्री शारदा महाशक्तिपीठ मंदिर | Sharda Peeth

admin 6 January 2022
Sharada Peeth structure ruins in POK
Spread the love

अजय सिंह चौहान || सनातन धर्म के लिए अति महत्वपूर्ण और माता सती के 18 महा शक्तिपीठों (Sharda Peeth in POK) में से एक शारदापीठ या शारदा विश्वविद्यालय किसी समय दक्षिण एशिया में सबसे प्रसिद्ध और शिक्षा का प्रमुख केन्द्र हुआ करता था। उस समय के कई विद्धानों और इतिहासकारों ने हिंदू वैदिक पद्धतियों और शिक्षा के लिए प्रमुख केंद्र रहे कश्मीर और वहां के श्री शारदा देवी के मंदिर की तुलना कोणार्क सूर्य मंदिर और सोमनाथ मंदिर के साथ की थी। इस शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि देवी सति का दायां हाथ यहां गिर गया है।

जिन इतिहासकारों और साहित्यकारों या विद्वानों ने शारदा पीठ मंदिर की दिव्यता और भव्यता को स्वयं देखा था उन्होंने अपनी रचनाओं में इसका जिक्र जरूर किया। इतिहासकारों ने उस इमारत को प्राचीन वास्तुकला का एक बहुत अच्छा उदाहरण बताया। कुछ विद्वानों के अनुसार संपूर्ण कश्मीर को ही शारदा पीठ (Sharda Peeth in POK) के रूप में जाना जाता था। आदि शंकराचार्य ने यहां एक विश्वविद्यालय की भी स्थापना की थी जिसमें दुनियाभर के छात्रों को यहां शिक्षा दी जाती थी।

ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर कहा जाता है कि एक चीनी बौद्ध भिक्षु, जिसका नाम जुआनजांग था, उसने 632 इसवी में इस शिक्षण केंद्र का दौरा किया था और वह वहां दो साल तक रहा। इस दौरान उसने इस स्थान से जुड़ी अनेकों गतिविधियों को देखा और वहां के पुजारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की सराहना में बहुत कुछ लिखा।

वर्ष 1148 इसवी में महाकवी कल्हण द्वारा लिखित एक पुस्तक ‘‘राजतरंगिणी’’ में श्री शारदा देवी मंदिर और इसके भौगोलिक स्थान का विस्तारपूर्वक उल्लेख है। कल्हण ने लिखा है कि ललितादित्य के शासनकाल के दौरान, जो 8वीं शताब्दी में था, गौड़ बंगाल के एक राजा के कुछ अनुयायियों ने भी कश्मीर का दौरा किया था और शारदा देवी मंदिर (Sharda Peeth in POK) में पूजा की थी।

सन 1030 में, मुस्लिम इतिहासकार अल-बेरुनी जो एक फारसी विद्धान था ने भी कश्मीर का दौरा किया। अल-बेरुनी के अनुसार, मंदिर में श्री शारदा देवी (Sharda Peeth in POK) ) की जो मूर्ति थी वह लकड़ी की थी। अल-बेरुनी ने शारदा मंदिर की भव्यता और महत्व की तुलना मुल्तान के उस दौर के सूर्य मंदिर, सोमनाथ मंदिर और विष्णु चक्रवर्मन मंदिर से की थी। अल-बरुनी के अनुसार शारदा तीर्थ धार्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्थल था।

कश्मीर में बने लगभग सभी मंदिरों की निर्माण शैली और विशेषकर शारदा मंदिर (Sharda Peeth) के विषय में कहा जाता है कि कश्मीर की अपनी खुद की निर्माण शैली और वास्तुकला है। और संभवतः यह शैली राजा ललितादित्य के शासनकाल के दौरान विकसित हुई थी और 9 वीं सदी के आते-आते राजा अवंतिवरमन के शासनकाल के समय तक यह निर्माण शैली अपनी चरम पर थी।

क्या गलत होगा अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनता है तो? | India Hindu Nation

कश्मीरी निर्माण शैली में जो भी प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर आज शेष हैं उनमें से मार्तंड में सूर्य मंदिर और श्रीनगर में शंकराचार्य मंदिर प्रसिद्ध हैं। इस शैली में आम तौर पर, एक मंदिर दो हिस्सों में बना होता है, जिसके अनुसार एक हिस्से में प्रमुख चैकोर भवन और उसके सामने एक बड़ा आंगन होता है। मंदिर के एक हिस्से में शिक्षकों और छात्रों के लिए विशेष स्थान दिया जाता है। प्राचीन शारदा मंदिर (Sharda Peeth) में भी कश्मीरी स्थापत्य शैली की सभी महत्वपूर्ण विशेषताएं विकसित थीं।

शारदा मंदिर (Sharda Peeth in POK) का यह स्थान समुद्र तल से 11,000 फीट की ऊंचाई पर है और श्रीनगर से करीब 115 किलोमीटर दूरी पर है। शारदा मंदिर के पास ही अमरचुंड नामक एक झील भी है, जिसके विषय में कहा जाता है कि ऋषि शांडिल्य यहां ध्यान-साधना करने आया करते थे।

कुछ इतिहासकारों के अनुसार आज हम जिस शारदा मंदिर (Sharda Peeth in POK) के अवशेषों को देखते हैं उसका निर्माण 12 वीं शताब्दी के मध्य में, जैशिमहा के शासनकाल में किशनगंगा घाटी के एक आर्य सारस्वत ब्राह्मण सरदार द्वारा करवाया गया था। शेष बचे अवशेषों के आधार पर बताया जाता है कि मंदिर की लंबाई 142 फीट और चैड़ाई 94.6 फीट रही होगी। मंदिर की बाहरी दीवारें 6 फुट चैड़ी और 11 फुट लंबी थीं और 8 फीट ऊंचाई वाली मेहराब थीं।

सिकंदर शाह मिरी ने शारदा महाशक्ति पीठ (Sharda Peeth) को किया था तबाह

शारदा पीठ (Sharda Peeth) विश्वविद्यालय की प्रमुख देन शारदा स्क्रिप्ट है जो कश्मीरी भाषा की मूल स्क्रिप्ट है। कुछ जानकारों का मानना है कि गुरूमुखी और पंजाबी लिपि भी शारदा लिपि पर ही आधारित है। दसवीं शताब्दी के आसपास कश्मीरी भाषा को लिखने के लिए शारदा लिपि का प्रयोग किया गया था। पौराणिक कश्मीरी शास्त्र शारदा लिपि में ही लिखे गए हैं। शारदा लिपि का जन्म संभवतः मूल ब्राह्मी से विकसित हुआ। विद्वानों, शासकों तथा हिन्दू, मुस्लिम, बौद्ध आदि सभी धर्म के लोगों ने लिखने के लिए शारदा लिपि का खूब इस्तेमाल किया। इसी के चलते ललदेद, रूपा भवानी, नन्द ऋषि तथा अन्य भक्ति कविताएं शारदा लिपि में ही लिखी गई थीं जो आज भी पुस्तकालयों में मौजूद हैं। हालांकि, अब शारदा लिपि का प्रयोग केवल कश्मीर के हिन्दू पंडितों तक ही सीमित रह गया है।

किसी समय में कश्मीर का यह शारदा पीठ (Sharda Peeth in POK) मंदिर हिंदू वैदिक पद्धतियों और शिक्षा के लिए प्रमुख केंद्र हुआ करता था। पूर्ण रूप से इस्लाम में परिवर्तित होने से पहले तक कश्मीर का यह क्षेत्र शारदा मंदिर के कारण ‘शारदा देश’ कहा जाता था और वहां के निवासियों को ‘शारदापूरवासी’ या शारदा शहर के निवासी भी कहा जाता था।

कश्मीरी हिंदू शारदा देवी के प्रति पूर्णरूप से समर्पित थे। अपनी दैनिक पूजा-पाठ के रूप में, कश्मीरी हिंदुओं ने ‘नमस्ते शारदे देवी काश्मीरपुर-वासिनि, त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे’ जैसे वाक्यांश को पूर्ण रूप से मन में धारण किया हुआ था। जिसका अर्थ है – नमस्ते, हे शारदा देवी, कश्मीरपुर वासिनी। मैं प्रतिदिन आपकी प्रार्थना करता हूं, कृपया मुझे ज्ञान का दान दें।

माना जाता है कि कई प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों की रचना इसी शारदा देश में की गई थी। ऋषि शांडिल्य के समय से, कश्मीर संस्कृत भाषा, साहित्य, खगोल विज्ञान, ज्योतिष और न्यायशास्त्र के लिए प्रसिद्ध था और कला और वास्तुकला का एक प्रसिद्ध केंद्र भी था। राजा ललितादित्य के समय यानी 8वीं शताब्दी में कश्मीर को हिंदू धर्म के अध्ययन के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता था। भारतीय उप महाद्वीप में शारदा पीठ (Sharda Peeth) एक जाना पहचाना स्थान रखता था। यहां शिक्षा ग्रहण करने के लिए कंबोडिया, म्यानमार, तिब्बत, आफगानिस्तान, इंडोनेशिया, भूटान, नेपाल ईरान, थाइलैंड और प्राचीन हरिवर्ष यानी आज के चीन तक से भी विद्यार्थी आते थे।

About The Author

admin

See author's posts

2,013

Post navigation

Previous: सिकंदर शाह मिरी ने शारदा शक्ति पीठ को किया था तबाह | Sharda Peeth
Next: पृथ्वी के करीब आ रहा है ‘तबाही का देवता’ | Apophis Asteroid

Related Stories

Solar energy plants in desert of India
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

admin 13 March 2026
World Economic Forum meeting in Davos 2024
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

admin 13 March 2026
Battle between Paundraka and Lord Krishna
  • अध्यात्म
  • विशेष

रात में पौण्ड्रक का आक्रमण

admin 13 March 2026

Trending News

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy) Solar energy plants in desert of India 1
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

13 March 2026
सरकार या Goverment क्या है? World Economic Forum meeting in Davos 2024 2
  • विशेष
  • षड़यंत्र

सरकार या Goverment क्या है?

13 March 2026
रात में पौण्ड्रक का आक्रमण Battle between Paundraka and Lord Krishna 3
  • अध्यात्म
  • विशेष

रात में पौण्ड्रक का आक्रमण

13 March 2026
राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान An Ancient Indian King and the Modern Constitution 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

12 March 2026
अन्याय और अधर्म का प्रतिकार ही सनातन धर्म है: जगद्गुरु शंकराचार्य Retaliation against injustice and unrighteousness is the eternal religion 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

अन्याय और अधर्म का प्रतिकार ही सनातन धर्म है: जगद्गुरु शंकराचार्य

11 March 2026

Total Visitor

092749
Total views : 170113

Recent Posts

  • सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)
  • सरकार या Goverment क्या है?
  • रात में पौण्ड्रक का आक्रमण
  • राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान
  • अन्याय और अधर्म का प्रतिकार ही सनातन धर्म है: जगद्गुरु शंकराचार्य

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.