Saturday, May 9, 2026
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Fortis Hospital Noida : फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा में पहली बार रोबोटिक ने किया किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी

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ऋषि तिवारी


नोएडा। फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने पहली बार, म्यांमार के 68-वर्षीय मरीज की सफल रोबोट-एडेड किडनी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। मरीज क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ से पीड़ित थे और पिछले साल जून से डायलसिस पर थे। मरीज का उपचार डॉ पीयूष वार्ष्णेय, डायरेक्टर – यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा के नेतृत्व में डॉक्टरों की अनुभवी टीम ने किया और उन्हें 8 दिनों बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई।

मरीज पेट के भाग में मोटापे से ग्रस्त थे जिसकी वजह से सर्जरी के बाद हीलिंग में काफी मुश्किलें पेश आतीं और इंफेक्शन का भी खतरा था। इसके अलावा, डायलसिस के दौरान भी, मरीज को कई समस्याएं पेश आ रही थीं, जैसे वे कई बार बेहोश हो जाते, उनकी मांसपेशियों में काफी जकड़न पैदा होती या लो ब्लड प्रेशर की समस्या पेश आती। इन तमाम तकलीफों की वजह से जब वह अपनी दैनिक गतिविधियों को भी ठीक प्रकार से करने में असमर्थ हो गए, तो उनके परिजनों ने किडनी ट्रांसप्लांट का विकल्प चुना और उपचार के लिए मरीज को फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा में भर्ती कराया।

मरीज को जब अस्पताल लाया गया तो वह काफी कमजोर थे, और टॉक्सिन्स के जमाव तथा डायलसिस के कारगर नहीं होने की वजह से उनका पोषण स्तर भी बिगड़ चुका था। अस्पताल में उनकी विस्तृत तरीके से मेडिकल जांच की गई जिसमें ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, कार्डियाक जांच, नसों और धमनियों का मूल्यांकन तथा अन्य कई टेस्ट शामिल हैं। इनके नतीजों ने किडनी ट्रांसप्लांट की पुष्टि की। लेकिन पेट में मोटापे और कमजोर इम्यूनिटी के चलते जटिलताओं का रिस्क काफी बढ़ चुका था और ऐसे में रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट ही बेहतर विकल्प था। मरीज की बहन अपने भाई के उपचार के लिए डोनर के रूप में आगे आयीं। इस सर्जरी में 4-5 घंटे लगे और मरीज की रिकवरी भी बिना किसी जटिलता के सुगम तरीके से हुई।

इस मामले की जानकारी देते हुए, डॉ अनुजा पोरवाल, डायरेक्टर – नेफ्रोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा ने कहा, “रोबोट की मदद से किडनी ट्रांसप्लांट से मरीजों के मामले में बेहतर नतीजे सामने आते हैं, खासतौर से यदि मरीजों की उम्र अधिक हो या वे मोटापे के शिकार हों। रोबोटिक सर्जरी की सटीकता के चलते जटिलताओं का रिस्क कम होता है और मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है। छोटे आकार का चीरा लगाने से मरीज को कम तकलीफ होती है और एडवांस टेक्नोलॉजी की सहायता से ट्रांसप्लांट भी अधिक सटीक और सुरक्षित होता है, जिसके परिणामस्वरूप मरीज जल्द स्वास्थ्यलाभ कर अपनी दैनिक गतिविधियों को खुद करने में सक्षम बनते हैं।”

डॉ पीयूष वार्ष्णेय, डायरेक्टर – यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा, ने कहा, “रोबोट की मदद से की जाने वाली सर्जरी के कई फायदे होते हैं, खासतौर से जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित बुजुर्ग मरीजों के लिए यह उपयोगी साबित होती है। पेट के मोटापे से ग्रस्त मरीजों के मामले में, रोबोट की मदद से की जाने वाली सर्जरी में सर्जिकल साइट तक आसानी से पहुंचा जाता है, यह इंफेक्शन और हर्निया जैसी जटिलताओं को कम करने के साथ-साथ तेजी से रिकवरी में भी सहायक होती है। रोबोटिक ट्रांसप्लांट के लिए पेरी-अंबलिकल रीजन में 5 से.मी. आकार का चीरा लगाया जाता है, जो पारंपरिक सर्जरी की तुलना में काफी कम होता है, और उसके लिए मांसपेशी में चीरा लगाने की जरूरत होती है। इस प्रक्रिया में, 10x मैग्नीफिकेशन के चलते धमनियों और नसों की सटीक पहचान हो पाती है, जिससे इस्किमिया (इस कंडीशन में शरीर के किसी भाग में रक्तप्रवाह में कमी की वजह से उस स्थान के टिश्यू को नुकसान पहुंचता है) टाइम और ब्लीडिंग का जोखिम कम होता है।”

मोहित सिंह, ज़ोनल डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा, ने कहा, “यह नोएडा में रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट का पहला मामला है जिसे फोर्टिस हॉस्पीटल में किया गया। यह उल्लेखनीय सर्जरी मरीजों की देखभाल के लिए एडवांस मेडिकल टेक्नोलॉजी तथा उत्कृष्टता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हम सर्वोच्च क्वालिटी की केयर के साथ-साथ अपने मरीजों के लिए सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत रहते हैं।”

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