Wednesday, June 17, 2026
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थोड़ी-सी बरसात से डूबते शहर

अपने देश में जिस गति से लोग शहरों की तरफ भाग रहे हैं और उसी के मुताबिक शहरों का विकास हो रहा है किन्तु इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि गांव वीरान हो रहे हैं और शहरों की आबादी बढ़ रही है। इसमें भी सबसे बड़ी बात यह है कि शहरों एवं महानगरों में यदि थोड़ी सी भी बारिश हो जा रही है तो शहरों का कबाड़ा हो जा रहा है।

नालियां एवं बड़े नाले भर जा रहे हैं। शहर डूब जा रहे हैं, इससे अब लोगों में त्राहिमाम मच रही है। आखिर यह सब क्या है? यदि यही स्थिति रही तो शहर रहने लायक नहीं रह जायेंगे। इस समस्या की तरफ केन्द्र सरकार एवं सभी राज्य सरकारों को ध्यान देना होगा अन्यथा स्थिति बद से बदतर होती जायेगी।
– सोनू मिरोठा, दरियागंज

राजनीति सिर्फ सेवा का माध्यम बने, न कि धन कमाने का
वैसे तो राजनीति में जो भी लोग हैं वे यही कहते हैं कि राजनीति में मात्र सेवा के लिए आये हैं किन्तु अकसर देखने में आता है कि राजनीति में थोड़ी सी कामयाबी मिलते ही अधिकांश लोगों के इरादे बदल जाते हैं। राजनीति से अर्थ कमाने के फेर में कई नेताओं के राजनीतिक कैरियर भी बर्बाद हो चुके हैं।

वास्तव में आज तमाम लोग राजनीति में यह सोचकर आते हैं कि थोड़े से परिश्रम के बाद यदि कुछ हासिल हो जाये तो कितना ही अच्छा होगा जबकि देशवासी चाहते हैं कि राजनीति किसी भी रूप में अर्थ कमाने का जरिया न बने, सिर्फ जन सेवा का ही माध्यम रहे।
– सुधीर मंडल, घोरबंकी

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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