Skip to content
7 May 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • पर्यावरण
  • भाषा-साहित्य

महुए की मादक गंध और पलाश की हरियाली

admin 16 April 2023
MAHUA PICKING WOMAN

पलाश मेरे जिले की सांस्कृतिक धरोहर और आर्थिक संबल देने वाले हैं।

Spread the love

नथुनों से इन दिनों महुए की मादक गंध पता नहीं कहां से टकरा रही है। खूशबू भाव विभोर कर रही है। दूसरी ओर, पलाश के हरे पत्तों के बीच से आ रही ठंडी हवा इस मादक गंध को और बढ़ा रही है। प्रभात में खिला सुमन रागिनी के स्वर में झूम रहा है। जो लोग मेरे गृह जिले पलामू और राज्य झारखंड को जानते होंगे, उन्हें महुआ और पलाश की सांस्कृतिक व आर्थिक महत्ता की जानकारी होगी।

पहले बात महुआ की। अभी सफेद, बिलकुल दूध की तरह, महुआ पेड़ पर है। सुबह में सूर्य की किरणों से पहले यानी प्रभात में ये फूल चूने लगते हैं। इन फूलों से बचपन की दो यादें जुड़ी हैं, एक खाने की तो दूसरी चुनने की। तब हम दोनों भाई मौका पाते ही पनेरीबांध चले जाते थे। पनेरीबांध से कोई पांच-सात किलोमीटर पर था माई (दादी) का ममहर खोहरी। यहां रहने वाले उनके भाई चंदरदेव बाबा दूध में सिझाया हुआ महुआ ला देते थे। अद्भुत मिठास होती थी इसकी।

Daltanganj Jungction

डालटनगंज में हमलोग प्रो. केएस अग्रवाल जी के मकान में रहते थे। सुबह हुई नहीं कि हम दोनों भाई, उनके दोनों बेटों राजू और संजय के साथ घर के पास के महुआ के पेड़ से सीजन की शुरुआत में फूल चुन लिया करते थे। शुरू में ये गिनती में होते थे जिन्हें हम छुपा कर रखते थे। सीजन खत्म होते-होते सभी कुछ किलो के मालिक हो जाते थे। इन्हें भी हम घरवालों से छुपाए रखते थे। अब भी नहीं बताएंगे।

अपने इस अमूल्य खजाने को हम सभी पास की एक दुकान में बेचते थे। पांचवीं-छठी कक्षा में आते-आते ज्ञान चक्षु खुलने लगे और बंद हो गया महुआ चुनना। बाद में पता चला कि इस महुए का तो अलग ही अर्थशास्त्र है। फूल सूखने के बाद पशुओं को चारे के रूप में दिया जाता है तो इससे पारपंरिक शराब भी बनती है। तभी तो हमारे जिले में एक बात प्रचलित है-फलनवां, सहिए-सांझे महुआ चढ़ा लेले हऊ।

 

फूल जब फल का रूप ले लेता है तो इसका महत्व और बढ़़ जाता है। इसके बीज से तेल निकलता है, जिसे डोरी का तेल कहा जाता है। इसका इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधन और डिटरजेंट बनाने में होता है। मैंने फल खाने और तेल को भोजन छानने में इस्तेमाल की बात सुनी है पर खुद का अनुभव नहीं है।

अब बात करते हैं पलाश की। पलाश के पेड़ और इसके झूरमुट पलामू के हर गांव में हैं। मेरे गांव में भी हैं और पिछले साल की तस्वीर गवाह भी है। फागुन के महीने में तो इसके फूल ऐसी आभा बिखेरते हैं जिससे लगता है कि पूरा क्षेत्र ही भगवामय हो गया है। फूल को सुखा कर गुलाल बनाया जाता है। बिलकुल प्राकृतिक आज की भाषा में आर्गेनिक। फूल को पानी में डाल कर छोड़ दें तो ऐसा रंग तैयार होता है कि रंगों से दूर रहने वाली भी कहे-रंग दे मोहे…। बसंत समाप्त होते ही पलाश पर लाह का लगना। फिर इन्हें उतारकर बाजार तक पहुंचाना।

कुल मिलाकर कहें तो महुआ और पलाश मेरे जिले की सांस्कृतिक धरोहर और आर्थिक संबल देने वाले हैं। महुए की तस्वीर मित्र मृत्युंजय शर्मा ने भेजी है। यह लेख पुराना है, पर यादें जितनी पुरानी हों उतनी ही ज्यादा सुखद होती हैं।

– प्रभात ‘सुमन’

About The Author

admin

See author's posts

Post navigation

Previous: कुछ सवाल ऐसे भी हैं जिनका कोई जवाब ही नहीं है?
Next: अमर बलिदानी – शहीद मंगल पांडे

Related Stories

National seminar on Sustainable Rural Development - Indian Cow Model concluded
  • पर्यावरण
  • विशेष

सतत ग्रामीण विकास – भारतीय गाय मॉडल विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी संपन्न

admin 15 March 2026
Solar energy plants in desert of India
  • पर्यावरण
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विशेष

सोलर एनर्जी से सावधान (Beware of Solar Energy)

admin 13 March 2026
Polluted drinking water in India
  • पर्यावरण
  • भ्रष्टाचार
  • विशेष
  • स्वास्थ्य

UP में प्रदूषित जल से सावधान!

admin 4 March 2026

Trending News

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys! Men was not monkey 1
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!

1 May 2026
नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा Noida Protest Illegal Detention 2
  • देश
  • विशेष

नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा

29 April 2026
‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 3
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 4
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026

Tags

नोएडा मीडिया क्लब नोएडा सिटीजन फोरम भाजपा सरकार योगी सरकार सीएम योगी
  • Men was not monkeyसुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!
  • Noida Protest Illegal Detentionनोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा
  • bharat barand‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

Recent Posts

  • सुनो बन्दर की औलादों | Listen up, Hindus are not the offspring of monkeys!
  • नोएडा सिटीजन फोरम ने प्रशासन को घेरा
  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभी उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.