Skip to content
13 March 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • पर्यावरण

सनबर्ड (Sunbird) – ऋतु-परिवर्तन के अनुसार बदलने वाले अनोखे पक्षी

admin 26 February 2021
Sun Birds & Colourful birds in India
Spread the love

अजय सिंह चौहान || सनबर्ड (Sunbird) या सूर्य-पक्षी को भारत में प्रायः ‘शकरीखोरा’ के नाम से जाना जाता है। प्रकृति से अनूठी सुन्दरता प्राप्त किए हुए यह पक्षी आकार-प्रकार में अपने-आप में आश्चर्य की भांति लगता है। यह एक एैसा पक्षी है जिसे यदि कोई एक बार पहचान ले तो वह उसे कभी नहीं भूल पाएगा। हमारे आस-पास के तथा घरेलू बाग-बगीचों, हरे-भरे वन प्रदेशों तथा ऐसे स्थानों में, जहां फूलों का मधुररस या अमृतरस सरलता से मिल सकता है वहां इन्हें फूलों पर मंडराते हुए आसानी से देखा जा सकता है। इन पक्षियों का कलरव बड़ा ही कर्ण-प्रिय एवं मन-मोहक होता है।

बसन्त ऋतु के आते ही जब सेमल के वृक्षों पर फूलों की बहार आने लगती है तो उन पर इन पक्षियों का मेला-सा लगने लग जाता है। प्रातः होते ही वे सबसे पहले वहां आ जाते हैं और सन्ध्याकाल तक वे उस मधुर-रस का आनन्द उठाते रहते हैं। वे इसे जी भर कर पीते हैं, फिर भी नहीं अघाते और सुबह होते ही दूसरे दिन फिर वहां आ पहुंचते हैं। उनका यह सिलसिला तब तक जारी रहता है जब तक कि फूलों की बहार रहती है। सेमल का वृक्ष ही मानो उनका मदिरालय है। इसकी खास आदत है कि यह उड़ता हुआ भी फूलों का रस पी लेता है। इसके अतिरिक्त मुंह का स्वाद बदलने के लिए जब-तब छोटे-छोटे कीड़ों को भी यह बड़े ही चाव से खाता है।

रंग एवं आकार के आधार पर पक्षी-विज्ञानियों ने इनको 95 प्रकार की विभिन्न उपजातियों या प्रजातियों में विभाजित किया है। जिसमें से अफ्रीका में इस प्रजाति की संख्या सबसे अधिक पाई जाती है। जैसे- येलोबेक्ड-सनबर्ड, रेडथ्रोट-सनबर्ड, पर्पल-सनबर्ड, प्लेन-सनबर्ड, ग्रीन-सनबर्ड, रीगल-सनबर्ड (Sunbird) आदि। यह पक्षी कुछ-कुछ अमेरिकन हमिंगबर्ड अथवा अस्ट्रेलिया में पाये जाने वाले हनिईटर की तरह भी दिखता है।

Sun Birds & Colourful birds in India 2हमारे देश में इसमें से मुख्यतः दो प्रकार की प्रजातियां ही देखने को मिलती हैं – जिनमें से एक वह जिसका रंग हल्का बैंगनी होता है तथा दूसरी गाढ़े बैंगरी रंग की है। इसके बैंगनी रंग में कुछ ऐसा चमकीलापन होता है कि रोशनी के अनुरूप इसका रंग भी बदला-सा प्रतीत होता रहता है, अर्थात् छांव में यह काला और धूप में कभी हरा तो कभी नीला मालुम होता है। इसके अतिरिक्त ऋतुओं में परिवर्तन के अनुसार भी इसके रंगों में परिवर्तन आता-जाता रहता है।

भारतीय उपमहाद्वीप के सदाबहार जंगलों, तराई वाले मैदानों से लेकर दक्षिण भारत एवं श्रीलंका में इसे अत्यधिक देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त मौसम तथा जलवायु के अनुसार ये पक्षी अपना स्थान भी बदलते रहते हैं।
इस पक्षी की लम्बाई लगभग तीन इंच से छः इंच तक होती है। इसकी चोंच लम्बी, पैनी तथा घुमावदार होती है, जिसमें मादा की चोंच नर की तुलना में कम घुमावदार, तीखी, किन्तु अधिक लम्बी होती है। इनकी यही तीखी व पैनी चोंच फूलों का रस चूसने में इनकी बहुत मदद करती है।

इस पक्षी का घोंसला पेड़ की डाल या टहनी से लटकता हुआ तथा मकड़ी के जाल-सा सुगठित होता है जिसके कारण इसके भीतर पानी की एक बुंद तक नहीं जा पाती है। इस घोंसले का आकार बहुत कुछ सोडा-वाटर की बोतल जैसा दिखता है।

स्वभाव से विलासी और मधुपायी होने के कारण यह चिड़िया अपने घोंसले में सेमल की रूई की मुलायम सेज बिछाए रहती है। इस घोंसले के भीतर यह कई प्रकार की वस्तुओं का भी इंतजाम करके रखती हैं। यह घोंसला मुलायम घास लम्बे तथा पतलेे तिनकों से बनाया जाता है, जो समान्यतः तीन सप्ताह में बनकर तैयार हो जाता है। इस घोंसले के भीतरी भाग को बीट तथा फलों-फूलों के रसों से लीप कर ही मादा अण्डे देती है।

बसन्त ऋतु से लेकर वर्षा काल तक इसे मादा को आकर्षित करने और दिल लुभाने की आवश्यकता रहती है, शायद इसीलिए नर पक्षी का रंग अधिक चित्ताकर्षक हो जाता है। इस दौरान इसका रंग अत्यधिक भड़कीली पोशाकें पहने हुए जैसा जैसा दिखता है। मादा को देखते ही नर उत्तेजित होकर ‘चिविट-चवट’ जैसी आवाजें निकालना शुरू कर देता है। सम्भवतः यह इसके प्रणय निवेदन का एक ढंग माना गया है। इस समय यह नर अपने पंखों को फड़फड़ाकर अपनी मोहक छटा बिखेरने लगता है।

मादा पक्षी प्रजनन-क्रिया में बड़ी सिद्धहस्त मानी जाती है- जो एक वर्ष में दो या इससे भी अधिक बार अंडे दे सकती है। अण्डे देने का समय मुख्यतः मार्च-अप्रैल का होता है। इसके अण्डों का रंग मटमैला सफेद होता है। जिस पर गन्दे दाग पड़े होते हैं। इनके अण्डों की संख्या दो से तीन तक ही देखी गई हैै। इसके अंडों के प्रबल शत्रु सांप, कौए तथा गिलहरियां हैं। फिर भी इनकी संख्या घटती नहीं है और आज भी पुष्प-वाटिकाओं में ये दर्जनों की संख्या में विचरते रहते हैं।

इन पक्षियों में अण्डों को सेहने का काम मादा का ही होता है। इस दौरान, जब तक कि अण्डों से बच्चे बाहर नहीं आ जाते तब तक मादा के लिए भोजन तथा उसको सुरक्षा उपलब्ध कराने का कार्य-भार नर पक्षी का होता है। किसी भी प्रकार से खतरे का आभास होने पर वह अपनी तीखी आवाज से मादा को सतर्क कर देता है। इस प्रकार नर तथा मादा दोनों अपने माता-पिता होने का दायित्व निभाते हैं। और जब बच्चे अण्डों से बाहर आ जाते हैं तो उनके लिए भोजन लाकर खिलाने का काम भी बारी-बारी से दोनों ही करते हैं।

इनके नवजात शिशु पक्षियों में कोई अन्तर नहीं होता। देखने में दोनों लगभग एक से लगते हैं, लेकिन जैसे-जैसे शिशु वयस्क होते जाते हैं, यह अन्तर स्पष्ट होता जाता हैं। बच्चों के वयस्क होने पर अन्य पक्षियों की ही भांति इनके माता-पिता भी उन्हें स्वतन्त्र छोड़कर घोंसले से बाहर आ जाते हैं।

इसी वंश की एक अन्य एक छोटी-सी चिड़िया जो फूलचुही के नाम से जानी जाती है। यह कद में तो अत्यधिक छोटी किन्तु चुलबुलाहट में सबसे आगे है। इसे भी फूलों से बेहद प्रेम है। देखने में इसका ऊपरी हिस्सा, गर्दन से पीठ तक कंजई होता है जिसमें हरे रंग की झलक आती है; नीचे का हिस्सा पीलापन लिए हुए सफेद होता है। इसकी दुम और डैने भूरे रंग के होते हैं। इसकी चोंच और पैर स्लेटी होती है जिसमें पीलापन भी रहता है। इसमें मादा की दुम कुछ छोटी होती है। इनके अंडों की संख्या भी दो से तीन तक ही होती है, जिनका रंग सफेद होता है जिस पर कुछ-कुछ भूरे रंग के दाग पड़े होते हैं। 

About The Author

admin

See author's posts

20,363

Post navigation

Previous: अनूपशहर का पौराणिक इतिहास और साक्ष्य | Historical of Anoopshahar in UP
Next: ग्रीन टी (Green tea) बचा सकती है बुढ़ापे की दिक्कतों से

Related Stories

Polluted drinking water in India
  • पर्यावरण
  • भ्रष्टाचार
  • विशेष
  • स्वास्थ्य

UP में प्रदूषित जल से सावधान!

admin 4 March 2026
Sribhavishyamahapuranam
  • पर्यावरण
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

महाराज शान्तनु मेघशर्मा की शरण में

admin 4 February 2026
Peacock in ancient folklore and folk art
  • पर्यावरण
  • विशेष

प्राचीन लोक-कथाओं और लोक-कलाओं में मोर

admin 28 January 2026

Trending News

राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान An Ancient Indian King and the Modern Constitution 1
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान

12 March 2026
अन्याय और अधर्म का प्रतिकार ही सनातन धर्म है: जगद्गुरु शंकराचार्य Retaliation against injustice and unrighteousness is the eternal religion 2
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

अन्याय और अधर्म का प्रतिकार ही सनातन धर्म है: जगद्गुरु शंकराचार्य

11 March 2026
UP में प्रदूषित जल से सावधान! Polluted drinking water in India 3
  • पर्यावरण
  • भ्रष्टाचार
  • विशेष
  • स्वास्थ्य

UP में प्रदूषित जल से सावधान!

4 March 2026
मिलावटखोर प्रदेश (Uttar Pradesh) का हाल बेहाल! UP Lucknow food safety news 4
  • अपराध
  • भ्रष्टाचार
  • विशेष
  • षड़यंत्र
  • स्वास्थ्य

मिलावटखोर प्रदेश (Uttar Pradesh) का हाल बेहाल!

4 March 2026
शंकराचार्य जी BJP, RSS, VHP का विरोध क्यों करते है? Narendra Modi drinking charanamrit from a spoon 5
  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • विशेष

शंकराचार्य जी BJP, RSS, VHP का विरोध क्यों करते है?

2 March 2026

Total Visitor

092676
Total views : 169948

Recent Posts

  • राजा के कर्तव्य और आधुनिक संविधान
  • अन्याय और अधर्म का प्रतिकार ही सनातन धर्म है: जगद्गुरु शंकराचार्य
  • UP में प्रदूषित जल से सावधान!
  • मिलावटखोर प्रदेश (Uttar Pradesh) का हाल बेहाल!
  • शंकराचार्य जी BJP, RSS, VHP का विरोध क्यों करते है?

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.