Monday, May 25, 2026
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ग्रीन टी (Green tea) बचा सकती है बुढ़ापे की दिक्कतों से

एक रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग ग्रीन टी का सेवन करते हैं उनके लिए बुढ़ापे में होने वाली दिक्कतों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। लगभग तीन साल तक चले एक अध्ययन के बाद 65 साल से अधिक उम्र वाले चैदह हजार महिलाओं और पुरुषों को इसमें शामिल किया गया था। इन लोगों में नियमित रूप से ग्रीन टी का इस्तेमाल करने वालों के ग्रुप में याददाश्त कमजोर होने, हाथ कांपने, चक्कर आने और लेकर ब्रेन स्ट्रोक जैसी कुछ भयंकर बीमारियों और परेशानियों का असर बहुत ही कम देखा गया।

इस अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों और डाॅक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि ग्रीन टी पीने से न सिर्फ भविष्य में होने वाले भयंकर खतरों को कम किया जा सकता है, बल्कि उन्हें समाप्त भी किया जा सकता है या रोका जा सकता है।

नाखूनों को बचाना है तो उंची एड़ी के चप्पल-जूतों से बचें
अक्सर हम ऊंची एडी के चप्पल जूते पहनने वाली महिलाओं के शरीर को होने वाले नुकसान के विषय में पढ़ते और सुनते रहते हैं लेकिन, एक अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है कि इससे पैर के नाखूनों को होने वाला नुकसान भी एक आम बात हो चुकी है।

दरअसल उंची एडी के चप्पल जूते पहनने वाली महिलाओं के पैर के नाखून उस वक्त मांसपेशियों में धंस जाते हैं जब उनके नाखून बहुत ही अधिक दबाव महसूस करते हैं। और कभी कभी तो यह परेशानी इतनी बढ जाती है कि पैर के अंगूठों के नाखूनों को ही हटाना पड जाता है।

हालिया अध्ययन के हवाले से बताया है कि उंची एडी के चप्पल जूते पहनने वाली महिलाओं के लिए इस फैशन के कारण अत्यधिक गंभीर समस्या पैदा हो सकती है। यदि समय पर इसका इलाज नहीं करवाया गया या फिर इस आदत को नहीं छोड़ा गया तो उस नाखून को सदा के लिए हटाना पड़ सकता है या कोई अन्य परेशानी हो सकती है। डाॅक्टरों ने सलाह दी है कि इस प्रकार की आदत के कारण होने वाले संक्रमण से बचने के लिए कुछ देर तक गुनगुने पानी में पैर को डालना चाहिए और उसके बाद इसे अच्छी तरह से सूखा कर कोई विशेष एंटीसेप्टिक लगाना चाहिए।

चेहरा बताएगा झूठ बोल रहे हैं या सच
ब्रिटेन के कुछ वैज्ञानिकों ने एक अहम दावा किया है कि कोई भी व्यक्ति जो झूठ बोलता है उसके सच और झूठ को उसी वक्त आसानी से पकड़ा जा सकेगा।
दरअसल, वैज्ञानिकों ने ‘फाइव टेल-टेल मसल ग्रुप’ का पता लगाया है, जो मनुष्य के चेहरों के हावभाव को कंट्रोल करने का काम करता है। इन्हीं मसल ग्रुप के जरिए वैज्ञानिक इस बात का पता लगा सकते हैं कि झूठ बोलते कौन से व्यक्ति के चेहरे का हावभाव असली और नकली है।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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