Monday, June 22, 2026
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महाभारत में भी मिलता है कैलाश महादेव मंदिर का उल्लेख | Kailash Mahadev in Agra

अजय सिंह चौहान || ताज नगरी और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर आगरा में स्थित कैलाश महादेव मंदिर के बारे में बहुत ही कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि यह भगवान शिव का एक बहुत ही दुर्लभ मंदिर है जो दुनिया में और कहीं भी नहीं है। आमतौर पर यहां आने वाले कई भक्तों को मंदिर के गर्भगृह में एक साथ दो शिवलिंगों को देखकर कुछ आश्चर्य तो होता है लेकिन वे फिर भी इसे नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि, कुछ ही लोग दो शिवलिंगों के एक साथ होने की विस्तृत जानकारी ले पाते हैं।

बहुत ही कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि आगरा में एक ऐसा शिवलिंग मंदिर भी है जहां दो शिवलिंग एक साथ स्थापित हैं और उनका संबंध त्रेता युग से जुड़ा हुआ है। इसीलिए यह अन्य शिव मंदिरों की श्रेणी में माना जाने वाला मंदिर नहीं बल्कि एक ऐसा दुर्लभ मंदिर है जिसे भगवान परशुराम और उनके पिता जमदग्नि के द्वारा स्वयं स्थापित किया गया था।

यह मंदिर दुर्लभ इसलिए है क्योंकि इस मंदिर के गर्भगृह में एकसाथ दो शिवलिंग स्थापित है और आज भी बहुत ही कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि आगरा में एक ऐसा शिवलिंग मंदिर भी है जहां दो शिवलिंग एक साथ स्थापित हैं और उनका संबंध त्रेता युग से जुड़ा हुआ है।

अद्भूत और दुर्लभ है आगरा का कैलाश महादेव मंदिर | Kailash Mahadev Mandir Agra

आगरा का पौराणिक इतिहास और युगों-युगों का रहस्य | History of Agra

दरअसल, पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि इस कैलाश महादेव मंदिर में स्थित इन दोनों ही पवित्र शिवलिंगों की स्थापना आज से हजारों साल पहले त्रेता युग में हुई थी। मंदिर में विराजित दोनों ही ज्योतिर्लिंगों को लेकर एक विस्तृत कथा भी है जिसके अनुसार यह माना जाता है कि भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि के द्वारा स्वयं इन ज्योतिर्लिंगों को स्थापित किया गया था।

भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि का आश्रम रेणुका धाम भी यहां से पांच से छह किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित है। और यह वही रेणुकाधाम आश्रम है जिसका उल्लेख श्रीमद्भागवत गीता में भी वर्णित है। कैलाश महादेव का यह मंदिर आगरा शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर यमुना नदी की तलहटी में बसे कैलाश सिकंदरा क्षेत्र में मौजूद है।

त्रेता युग में स्थापित हुए इन दुलर्भ शिवलिंगों के लिए बनाया गया मंदिर का जिर्णोद्धार समय-समय पर, कई राजाओं के द्वारा करवाया जा चुका है। और इसमें पांडवों के द्वारा भी पूजा-पाठ किया था। इसके अलावा बताया जाता है कि पृथ्वीराज चैहान और वीर शिवाजी ने भी यहां पूजा-अर्चना की थी और मंदिर के रख-रखाव में सहयोग दिया था।

सैकड़ों भक्त जहां प्रतिदिन पूजा अर्चना करने आते हैं, जबकि हर सोमवार को यहां भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। श्रावण माह में यहां लाखों लोग जलाभिषेक कर मनौती मांगते हैं। सावन के महिने में विशेष रुद्राभिषेक, ग्रहों की शांति, काल सर्पयोग एवं महामृत्युंज जाप करवाने वाले भक्तों और श्रद्धालुओं की यहां लाइन रहती है।

यहां आने वाले श्रद्धालुओं और भक्तों का मानना है कि सभी की मनोकामनाओं को पूरी करने वाले इस शिवालय में श्रद्धालुओं के कष्ट तो दूर होते ही हैं साथ ही साथ उन्हें अपार खुशियां भी मिलती हैं। भक्तों का मानना है कि मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करने के बाद ऐसा आभास होता है जैसे एक दम से मानसिक शांति मिल गई हो।

आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में स्थित कैलाश मंदिर में बड़ी ही धूमधाम से लगने वाले कैलाश मेले को आगरा के लोग एक पर्व की तरह मनाते हैं। यह मेला हर वर्ष सावन महीने के तीसरे सोमवार को आयोजित किया जाता है। इस विशेष अवसर पर यहां के वातावरण में भगवान शिव की भक्ति की बयार बहती है और आगरा का माहौल बहुत ही हर्षोल्लास भरा रहता है।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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