Saturday, June 20, 2026
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जतमई माता मंदिर – पर्यटन और धर्म दोनों एक साथ

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में माता दुर्गा का एक ऐसा पौराणिक और प्रसिद्ध मंदिर है जिसमें माता के चरण छूने के लिए प्राकृतिक जलधाराएं मंदिर के गर्भगृह के अंदर तक स्वयं ही पहुंच जाती हैं।

दरअसल, इस मंदिर की अन्य विशेषताओं में एक प्राकृतिक विशेषता ये है कि इसके ठीक बगल से प्राकृतिक जलधारा एक झरने के रूप में सदेव बहती रहती है। बरसात के दिनों में तो यह धारा मंदिर के गर्भगृह में माता के चरणों तक भी पहुँच जाती है। इसीलिए स्थानीय लोगों में मान्यता है कि ये जल धाराएं माता की सेवक हैं।

माता दुर्गा का यह मंदिर प्रमुख रूप से “जतमई” मंदिर के नाम से पहचाना जाता है। यह मंदिर अब मात्र एक मंदिर ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के सबसे लोकप्रिय पिकनिक स्थलों में से एक बन चुका है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 75 किलोमीटर की दुरी पर स्थित यह मंदिर गरियाबंद जिले में स्थित है।

 

Jatmai Mata Temple – Chattisgad

गरियाबंद जिले के पटेवा कस्बे के निकट स्थित जतमई नामक एक पहाड़ी जो करीब 200 मीटर क्षेत्र में फैली है, उसकी उंचाई करीब 75 मीटर, यानी करीब 246 फीट है। इसी पहाड़ी के शिखर पर विशालकाय पत्थर आपस में जुड़े हुए हैं। जिन्हें देखकर लगता है मानों इन्हें यहां किसी ने रखा हुआ है, जबकि यह एकदम प्राकृतिक है। और इसी पहाड़ी पर स्थित है “घटारानी” माता का यह मंदिर।

एक बड़े प्रकृतिक झरने के साथ ही बना जतमई माता का ये मंदिर मात्र इस क्षेत्र और प्रदेश के लिए ही नहीं बल्कि देशभर के श्रध्दालुओं और पर्यटकों के लिए सबसे लोकप्रिय पिकनिक स्थलों में से एक है।

Jatmai Mata Temple – Chattisgad 2

प्राकृतिक रूप से मात्र यही एक मंदिर स्थल नहीं बल्कि यहाँ का सम्पूर्ण क्षेत्र भी बेहद मनमोहक है। इसके चारों ओर फैली प्राकृतिक हरियाली और उंचे पहाड़ों से गिरते झरने यहां आने वाले पर्यटकों और दर्शनार्थियों के लिए यादगार बन जाते हैं। इसीलिए, ये स्थान धार्मिक महत्व तो रखता ही है साथ ही साथ पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद समृद्ध है।

इसलिए छत्तीसगढ़ के इस विश्वप्रसिद्ध धार्मिक, अध्यात्मिक और पर्यटक स्थल और जलप्रपात के बारे में माना जाता है कि झरने के रूप में गिर रही ये जल धाराएं माता की सेविका हैं जो सदेव माता के मंदिर के आसपास ही रहती हैं।

हालाँकि गर्मियों के मौसम में यह झरना और इसकी जलधाराएं करीब-करीब न के बराबर ही रहतीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है की आज से करीब 30 से 35 वर्षों पहले तक भी ये झरना और इसकी ये धाराएं प्राकृतिक रूप से गर्मियों में भी खूब बहा करतीं थीं। फिलहाल तो गर्मियों के कारण यहां इस झरने के कुछ प्राकृतिक कुंडों में ही थोड़ा-थोड़ा पानी दिखता है, लेकिन यदि आप यहां बरसात के मौसम में आएंगे तो नदी की तरह बहने वाला इसका एक अलग ही रूप दिखाई देता है।

गर्मियों के दिनों में भी यहाँ की हरियाली, पेड़ों की ठंडी छाव और यहाँ के झरनों का मीठा पानी पर्यटकों का मन मोह लेते हैं। अधिकतर पर्यटक तो इस झरने पर आकर नहाने का भरपूर मजा लेते देखे जा सकते हैं। इसके अलावा प्रति वर्ष चैत्र और शारदीय नवरात्र के अवसर पर यहाँ मेले का भी आयोजन किया जाता है जिसमें स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटकों की भी भीड़ देखी जा सकती है।

जटामाई माता मंदिर के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन रायपुर रेल्वे स्टेशन है जो यहाँ से करीब से 90 किलोमीटर की दुरी पर है। सड़क मार्ग से जटामाई माता मंदिर तक जाने के लिए रायपुर के पंडरी बस स्टैंड से यह करीब 90 किलोमीटर की दुरी पर है। इसके अलावा यहाँ का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा स्वामी विवेकानन्द अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो रायपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर है।

– मनीषा परिहार, भोपाल

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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