Tuesday, June 16, 2026
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बहुत बड़ा फर्क है अमरनाथ और मणिमहेश यात्रा में !

अजय सिंह चौहान || मणिमहेश कैलाश धाम हिमाचल प्रदेश में चंबा जिले के तहसील भरमौर में स्थित एक हडसर नाम के छोटे से गांव में स्थित है। यह धाम हिमालय के दुर्गम पहाड़ों में है, इसलिए यहां तक पहुंचना इतना आसान नहीं है जितना कि किसी भी मैदानी इलाके के तीर्थ स्थानों पर होता है। इसलिए ध्यान रखें कि, यह यात्रा उतनी आसान नहीं है जितनी की समझी जाती है।

मणिमहेश कैलाश धाम की यह यात्रा अत्यंत थका देने वाली यात्रा है। क्योंकि, यहां कटरा में स्थित वैष्णवदेवी की पहाड़ी पर मिलने वाली तमाम तरह की सुविधाओं की तरह सुविधाएं नहीं है और ना ही हर जगह आराम करने के लिए कुर्सियां हैं और ना ही जगह-जगह डाॅक्टरों का इंतजाम है। इसलिए, इस बात का खास ध्यान रखें कि यह यात्रा इतनी आसान नहीं है जितनी की समझी जाती है।

मणिमहेश कैलाश धाम की यात्रा पर जाने से पहले ध्यान रखें कि यहां की यात्रा के लिए कम से कम 12 साल और अधिक से अधिक 50 या 55 साल की उम्र होना चाहिए और शारीरिक रूप से विकलांग न हों। नहीं तो आपको यहां से वापिस भेद दिया जा सकता है। क्योंकि यहां लगातार पैदल चलना पड़ता है, जिसके कारण कई प्रकार की परेशानियां हो सकती हैं।

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मेरी मणिमहेश यात्रा के अनुभव

यहां मैं अपने खुद के अनुभवों के आधार पर यह बताने का प्रयास कर रहा हूं। क्योंकि मैं स्वयं भी इस यात्रा में जा चुका हूं। जबकि मणिमहेश कैलाश धाम की इस यात्रा के पहले मैंने दो बार अमरनाथ जी की यात्रा की है। और मेरी इन दोनों ही स्थानों की यात्राओं का अनुभव कहता है कि मणिमहेश कैलाश धाम की यात्रा बाबा अमरनाथ जी की यात्रा से ज्यादा मुश्किल नहीं है तो कम भी नहीं है। लेकिन, इन दोनों ही यात्राओं में मेरा जो मिलता जुलता अनुभव रहा है वह यही है कि अगर सच्चे दिल से इन यात्राओं को किया जाय तो ईश्वर को प्रकृति के रूप में और प्रकृति को ईश्वर के रूप में देखकर एक नया ही आनंद और अनुभव मिलता है।

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दरअसल, अमरनाथ गुफा समुद्र तल से लगभग 12,750 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। जबकि मणिमहेश तीर्थ समुद्रतल से लगभग 13,400 फिट की ऊंचाई पर स्थित है, यानी यह तीर्थ अमरनाथ गुफा से भी अधिक ऊंचाई पर स्थित है। इसलिए यहां अक्सर कई यात्रियों को श्वांस लेने में तकलीफ की शिकायत भी देखी जाती है। इसके अलावा, कश्मीर के पहाड़ों की तुलना में हिमाचल के पहाड़ कुछ अधिक ही उबड़-खाबड़ हैं। इसके अलावा, यहां की पथरिली, ऊंची-नीची और फिसलन भरी पहाड़ी चढ़ाई होने के कारण मैदानी क्षेत्रों से आने वाले अधिकतर तीर्थ यात्री एक दिन में मुश्किल से 4 से 5 घंटे तक की चढ़ाई चढ़ पाते हैं। इन सबसे अलग यहां के पैदल यात्रा मार्ग बाबा अमरनाथ जी की यात्रा मार्गों की तरह खुले और सीधे भी नहीं है।

अगर आप लोग भी मणिमहेश धाम की इस यात्रा पर जाना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि आप देश के किसी भी भाग में रहते हैं वहां से पंजाब के पठानकोट तक ही रेल सेवा उपलब्ध है, जबकि इस यात्रा की असली शुरूआत भी पठानकोट से शुरू होती है इसलिए यहां हम पंजाब के पठानकोट से मणिमहेश कैलाश झील तक की यात्रा के रास्ते बारे में ही विस्तार से बात करेंगे।

पठानकोट से चम्बा तक या फिर सीधे मणिमहेश धाम तक जाने के लिए हिमाचल रोड़वेज की बसें आसानी से मिल जाती हैं। आप चाहे तो यहां से टैक्सी की सेवाएं भी ले सकते हैं। यात्रा के अवसर पर हिमाचल में चंबा के बस अड्डे से मणिमहेश धाम की यात्रा के लिए हिमाचल परिवहन की अतिरिक्त रोड़वेज बसों की सुविधा भी बड़ी ही आसानी से मिल जाती है। इसके अलावा चम्बा से भी टैक्सी की सेवाएं ले सकते हैं।

अगर कोई यात्री हवाई जहाज से यहां तक आना-जाना चाहे तो उसके लिए भी यहां के पहाड़ों में बसों या टैक्सियों से ही सफर तय करना होता है, क्योंकि यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भी मणिमहेश धाम से लगभग 230 किमी दूर है।

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देश के कुछ जाने-माने मीडिया संस्थानों से जुड़े होने के कारण मैंने विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता का अनुभव किया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में काॅलमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में धर्म, अध्यात्म, इतिहास और धार्मिक यात्राओं के अलग-अलग विषयों पर विभिन्न प्रकार की जानकारियों से संबंधित लेख लिखना मेरा व्यावसाय ही नहीं बल्कि एक कर्म बन चुका है।
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