Skip to content
1 April 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram

DHARMWANI.COM

Religion, History & Social Concern in Hindi

Categories

  • Uncategorized
  • अध्यात्म
  • अपराध
  • अवसरवाद
  • आधुनिक इतिहास
  • इतिहास
  • ऐतिहासिक नगर
  • कला-संस्कृति
  • कृषि जगत
  • टेक्नोलॉजी
  • टेलीविज़न
  • तीर्थ यात्रा
  • देश
  • धर्म
  • धर्मस्थल
  • नारी जगत
  • पर्यटन
  • पर्यावरण
  • प्रिंट मीडिया
  • फिल्म जगत
  • भाषा-साहित्य
  • भ्रष्टाचार
  • मन की बात
  • मीडिया
  • राजनीति
  • राजनीतिक दल
  • राजनीतिक व्यक्तित्व
  • लाइफस्टाइल
  • वंशवाद
  • विज्ञान-तकनीकी
  • विदेश
  • विदेश
  • विशेष
  • विश्व-इतिहास
  • शिक्षा-जगत
  • श्रद्धा-भक्ति
  • षड़यंत्र
  • समाचार
  • सम्प्रदायवाद
  • सोशल मीडिया
  • स्वास्थ्य
  • हमारे प्रहरी
  • हिन्दू राष्ट्र
Primary Menu
  • समाचार
    • देश
    • विदेश
  • राजनीति
    • राजनीतिक दल
    • नेताजी
    • अवसरवाद
    • वंशवाद
    • सम्प्रदायवाद
  • विविध
    • कला-संस्कृति
    • भाषा-साहित्य
    • पर्यटन
    • कृषि जगत
    • टेक्नोलॉजी
    • नारी जगत
    • पर्यावरण
    • मन की बात
    • लाइफस्टाइल
    • शिक्षा-जगत
    • स्वास्थ्य
  • इतिहास
    • विश्व-इतिहास
    • प्राचीन नगर
    • ऐतिहासिक व्यक्तित्व
  • मीडिया
    • सोशल मीडिया
    • टेलीविज़न
    • प्रिंट मीडिया
    • फिल्म जगत
  • धर्म
    • अध्यात्म
    • तीर्थ यात्रा
    • धर्मस्थल
    • श्रद्धा-भक्ति
  • विशेष
  • लेख भेजें
  • dharmwani.com
    • About us
    • Disclamar
    • Terms & Conditions
    • Contact us
Live
  • तीर्थ यात्रा
  • धर्मस्थल
  • विशेष

जागेश्वर धाम- कब जायें, कैसे जायें, कहां ठहरें, कितना खर्च होगा? | Jageshwar Dham Tour

admin 22 August 2021
Jageshwar Dham 2
Spread the love

अजय सिंह चौहान || अगर आप उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में स्थित भगवान शिव के पावन धाम यानी ‘‘जागेश्वर धाम’’ के दर्शनों के लिए जाना चाहते हैं और साथ ही साथ अल्मोड़ा के आस-पास के अन्य पर्यटन स्थलों का भी आनंद लेना चाहते हैं तो यहां मैं बता दूं कि भगवान शिव के इस मंदिर को यानी जागेश्वर धाम को हमारे पौराणिक ग्रंथों में ‘‘हाटकेश्वर धाम’’ के नाम से भी पहचाना जाता है। इस धाम में छोटे-बड़े कुल 124 मंदिरों का एक समूह है जिसमें प्रमुख मंदिर भगवान शिव का है। और भगवान शिव के इस मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भी माना जाता है। ये सभी मंदिर एक ही पहाड़ी पर मौजूद हैं जो स्थानिय ‘‘जटा गंगा’’ नाम की एक नदी के किनारे की लगभग 6,200 फुट ऊंची एक ऊंची पहाड़ी है।

भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण यानी ए.एस.आई. के अनुसार यहां मौजूद वर्तमान संरचना के ये सभी मंदिर समूह वास्तुकला के हिसाब से गुप्त और पूर्व मध्ययुगीन समय के, यानी आज से करीब 2,500 वर्ष पुराने हैं। जबकि जागेश्वर धाम यानी भगवान शिव के इस मंदिर की स्थापना यहां अनादिकाल में ही हो चुकी थी।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव स्वयं ध्यान साधना किया करते थे। इसलिए यह स्थान न सिर्फ सनातन धर्म और अध्यात्म के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि कुछ विशेष सिद्धियां और शक्तियां प्राप्त संतों और योगियों की प्रमुख ध्यान तथा अध्यात्म स्थली भी है। इसी कारण जागेश्वर धाम को राज्य सरकार के द्वारा जल्द ही प्रदेश के पांचवे धाम के रूप में भी मान्यता दी जा सकती है।

अगर आप जागेश्वर धाम की यात्रा पर जाना चाहते हैं तो सबसे पहले तो यहां जान लें कि जागेश्वर धाम उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है और अल्मोड़ा शहर से जागेश्वर धाम के इन मंदिरों तक जाने के लिए पिथोरागढ़ रोड़ पर करीब 35 किलोमीटर का रास्ता तय करना होता है।

यह धाम दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रा में है इसलिए मैदानी क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए बारिश के मौसम में यहां की यात्रा करना किसी बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए यहां के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और फिर सितंबर से नवंबर के बीच का होता है। जबकि जुलाई और अगस्त के महीनों में पहाड़ी क्षेत्रा की बारिश के मौसम में यहां ना ही जायें तो बेहतर होगा।

हालांकि, इसके बावजूद भी बारिश के मौसम में यहां पर्यटक और दर्शनार्थियों की संख्या कम नहीं होती। क्योंकि यह धाम प्रमुख रूप से भगवान शिव का धाम है इसलिए इसी दौरान यानी सावन के महीने में ही यहां प्रमुख पूजा-पाठ और शिवरात्रि मेला भी आयोजित किया जाता है इसलिए यह धाम अधिकतर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है और वे किसी न किसी प्रकार से यहां पहुंच ही जाते हैं।

अब बात करते हैं दूरी की –
जागेश्वर धाम उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिले में पिथोरागढ़ रोड़ पर स्थित है और अल्मोड़ा शहर से जागेश्वर धाम की यह दूरी मात्रा 35 किलोमीटर।
अगर आप ट्रेन से जाते हैं तो यहां के सबसे नजदीकी काठगोदाम के रेलवे स्टेशन से जागेश्वर धाम की दूरी 120 किलोमीटर है जो करीब 4 से 5 घंटे में आसानी से तय हो जाती है।

अगर आप हवाई जहाज से भी जाते हैं तो यहां का सबसे नजदीकी अड्डा उधम सिंह नगर जिले के पंतनगर शहर में है जो जागेश्वर धाम मंदिर से करीब 150 किलोमीटर दूर है।

हरिद्वार-ऋषिकेश जा रहे हैं तो माता कुंजापुरी के भी दर्शन करते आना | Kunjapuri Devi in Uttarakhand

सबसे अच्छी बात ये है कि वर्तमान में लगभग हर प्रकार के धार्मिक और पर्यटन स्थान जो खास तौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में हैं उन सभी को अब सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ा जा चुका है। इसलिए जागेश्वर मंदिर भी सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

Jageshwar Dham 2अल्मोड़ा शहर तक जाने के लिए आसपास के सभी प्रमुख शहरों और राज्यों से सीधे रोडवेज बसों और प्राइवेट या लग्जरी बसों की और टैक्सियों की सुविधा आसानी से मिल जाती है।

अन्य प्रमुख शहरों से जागेश्वर धाम/अल्मोड़ा की दूरी –
– नैनीताल से जागेश्वर धाम की दूरी करीब 100 किलोमीटर।
– हरिद्वार से जागेश्वर धाम की दूरी करीब 340 किलोमीटर।
– देहरादून से जागेश्वर धाम की दूरी करीब 380 किलोमीटर।
– दिल्ली से जागेश्वर धाम की दूरी करीब 390 किलोमीटर और
– कानपुर से जागेश्वर धाम की दूरी करीब 490 किलोमीटर है।

अगर आप दिल्ली में हैं और अल्मोड़ा जिले में स्थित इस जागेश्वर धाम की यात्रा पर जाना चाहते हैं तो दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे से अल्मोड़ा के लिए रोडवेज या फिर निजी बसों की सुविधा आसानी से मिल जाती है।

दिल्ली से यह दूरी करीब 400 किलोमीटर है और इस दूरी के लिए सड़क मार्ग से करीब 10 से 11 घंटे का समय लग जाता है। किराये की बात करें तो दिल्ली से अल्मोड़ा तक उत्तराखण्ड रोडवेज बस का साधारण किराया करीब 540 रुपये लगता है। लेकिन, अगर आप किसी भी एयरकंडीशन वाली बस से जाते हैं तो यही किराया हजार रुपये से ऊपर ही देना पड़ेगा।

उत्तराखण्ड एक पहाड़ी राज्य है इसलिए यात्रियों को सबसे अधिक सड़कों के माध्यम से ही रास्ता तय करना होता है। इसलिए देश के दूर दराज के क्षेत्रों से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी यहां हवाई अड्डे से या फिर रेलवे स्टेशन से स्थानीय बसों और टैक्सियों के जरिए ही जागेश्वर धाम तक जाना होता है। इसके अलावा यहां आप अपने वाहनों से भी आना-जाना कर सकते हैं।

ट्रेन से – अब यहां ये जान लेना भी जरूरी है कि ट्रेन से या फिर हवाई जहाज से यात्रा करने के बाद भी आपको आगे की दूरी सड़क के रास्ते ही तय करनी होती है। इसलिए ट्रेन के द्वारा जाने वाले यात्रियों के लिए यहां जागेश्वर धाम के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम में है जो यहां से करीब 120 किलोमीटर दूर है। काठगोदाम के लिए दिल्ली, लखनऊ, देहरादून सहीत कई प्रमुख शहरों से सीधे ट्रेन की सुविधा है।

हवाई जहाज से – अगर आप यहां हवाई जहाज से जाना चाहते हैं तो उसके लिए यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा उधम सिंह नगर जिले के पंतनगर शहर में है, जो जागेश्वर मंदिर से करीब 150 किमी और अल्मोड़ा शहर से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर है। इसलिए यहां से आगे की दूरी सड़क मार्ग से ही तय करनी होती है।

जागेश्वर धाम में कहां ठहरें –
जागेश्वर धाम की यात्रा पर जाने से पहले ये भी ध्यान देना होगा कि यह धार्मिक तथा आध्यात्मिकता के साथ पर्यटन के लिहाज से भी बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इसके अलावा यहां की जलवायु और वातावरण मैदानी क्षेत्रों से आने वालों के लिए स्वर्ग के समान है इसलिए यहां साल के बारहों मास पर्यटकों और दर्शनार्थियों को देखा जा सकता है। और क्योंकि गर्मियों के मौसम में यहां एकदम शांत, सुखद और आत्मिक आनंद मिलता है इसलिए पर्यटक ही नहीं बल्कि धार्मिक तथा आध्यात्मिक लाभ के लिए भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग आना पसंद करते हैं।

तुलसी- औषधी एक लाभ अनेक | Benefits of Tulsi

यहां इस बात का भी ध्यान रखें कि जागेश्वर धाम मंदिर के आसपास रुकने के लिए यात्रियों के लिए कुछ खास या बड़े स्तर पर व्यवस्था फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं, और जो कुछ भी है वो महंगे हो सकते हैं। इसलिए जागेश्वर धाम के पास ठहरने की बजाय यहां से केवल 35 किमी दूर अल्मोड़ा शहर में ही ठहरना ज्यादा बेहतर हो सकता है। अल्मोड़ा शहर में कई प्रकार के आलीशान होटल और रिसाॅर्ट से लेकर कम से कम बजट के अनुसार गेस्टहाउस और लाॅज सभी उपलब्ध हैं।

इसके अलावा यहां कई छोटे-बड़े निजी होटल भी हैं जो आपको बजट के अनुसार मिल जाते हैं। अगर आप किसी निजी होटल में ठहरते हैं तो कम से कम 500 से 700 रुपये तक में अच्छी सुविधाओं वाला कमरा भी मिल सकता है। और अगर आप अपनी गाड़ी से या टू व्हीलर से भी जाते हैं तो करीब-करीब हर होटल में यहां फ्री पार्किंग की सुविधा भी मिल जाती है।

इन सबसे अलग यहां ठहरने के लिए कुमाऊ मंडल विकास निगम लिमिटेड यानी के.एम.वी.एन. के पर्यटक आवास गृह यानी गेस्ट हाऊस और वन विभाग का भी पर्यटक आवास केंद्र है। कुमाऊ मंडल विकास निगम लिमिटेड के पर्यटक आवास गृह यानी गेस्ट हाऊस में एक कमरा 1,300 रुपये से 2,200 रुपये तक में मिल जाता है।

अगर आप अल्मोडा शहर के अपने किसी भी होटल या गेस्टहाउस से निकल कर सुबह जागेश्वर धाम की यात्रा पर निकलते हैं तो शाम तक बहुत ही आसानी से इस यात्रा को एक ही दिन में पूरा कर लेते हैं।

स्थानीय स्तर पर यहां शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जागेश्वर धाम मंदिर के लिए शेयरिंग वाले कई लोकल वाहन जैसे जीप चलती हैं जो यात्रियों को सीधे मंदिर तक ले जाते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो टैक्सी भी ले सकते हैं।

जागेश्वर धाम और अल्मोड़ा के आसपास के प्राकृति सौंदर्य तथा अन्य दर्शनिय और पर्यटन स्थलों की सैर के लिए भी यहां टैक्सी की सुविधाएं उपलब्ध है।

भोजन व्यवस्था की बात करें तो अल्मोड़ा शहर या फिर जागेश्वर धाम में मसूरी या फिर नैनीताल जैसे कुछ प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के मुकाबले विभिन्न प्रकार के मन पसंद व्यंजन मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसका कारण है कि यह पर्यटन क्षेत्रा मसूरी और नैनीताल जितना प्रसिद्ध नहीं है। लेकिन, आप यहां के स्थानीय रेस्तरां और सड़कों के किनारे वाले स्टाल और ढाबों पर कुछ स्थानीय व्यंजनों का भी स्वाद चख कर एक नया अनुभव ले सकते हैं।

यहां होने वाले भोजन के खर्च की बात करें तो कोई निश्चित नहीं है कि यहां आपको कम से कम या फिर अधिक से अधिक कितना खर्च करना पड़ सकता है। लेकिन, क्योंकि यह क्षेत्रा आम जनजीवन से जुड़ा हुआ है इसलिए यहां हर प्रकार के भोजन और चाय नाश्ते की सुविधा भी उचित किमत में मिल ही जाती है।

कुछ खास बातों भी ध्यान रखें –
– जागेश्वर धाम की यात्रा पर जाने से पहले ध्यान में रखें कि यहां जाने के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का होता है।
– सर्दियों के मौसम में यहां बर्फबारी होने से तापमान में काफी गिरावट आ जाती है और ठंडक बढ़ जाती है इसलिए अपने साथ कुछ ज्यादा ही गरम कपड़े रखने पड़ते हैं।
– बारिश के मौसम में अगर आप यहां जाते हैं तो पहाड़ी इलाकों में होने वाली बारिश मैदानी इलाके की बजाय ज्यादा खतरनाक होती है और पहाड़ों के धंसने से कई जगहों पर रास्ते बंद हो जाते हैं इसलिए बारिश के मौसम में यहां या फिर किसी भी दूसरे पहाड़ी क्षेत्रों में ना जायें।
– अल्मोड़ा शहर से निकल कर जागेश्वर के लिए आगे बढ़ने से पहले ध्यान रखें कि जागेश्वर धाम में या इसके पास आपको एटी.एम. या पेट्रोल पंप की बहुत ही कम सुविधा देखने को मिलती है इसलिए पहले ही इंतजाम कर लें।
– पर्यटन के मौसम में यानी मैदानी इलाकों की भीषण गर्मियों के दौरान यहां सैलानियों की भीड़ अचानक से बढ़ जाती है और अच्छी सुविधाओं वाले अधिकतर होटलों के कमरे पहले से ही बुक हो जाते हैं। इसलिए आपको भी यहां जाने से पहले ही होटल की बुकिंग करवा लेनी चाहिए।

About The Author

admin

See author's posts

27,257

Post navigation

Previous: भारत के पांच प्रमुख पौराणिक एवं ऐतिहासिक विश्वविद्यालय | historical universities of India
Next: देव सूर्य मंदिर का इतिहास, वर्तमान और भविष्य | Dev Sun Temple Bihar

Related Stories

bharat barand
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

admin 1 April 2026
what nonsense is this - let them say
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

admin 31 March 2026
Bhavishya Malika
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

admin 31 March 2026

Trending News

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत bharat barand 1
  • देश
  • विशेष

‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत

1 April 2026
कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….! what nonsense is this - let them say 2
  • Uncategorized
  • मन की बात
  • विशेष
  • शिक्षा-जगत

कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!

31 March 2026
भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…! Bhavishya Malika 3
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!

31 March 2026
प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष” Ancient indian Psychological Warfare Method 4
  • कला-संस्कृति
  • विशेष

प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”

31 March 2026
रामायण और वेदों का संबंध Relationship between the Ramayana and the Vedas 5
  • विशेष
  • श्रद्धा-भक्ति

रामायण और वेदों का संबंध

27 March 2026

Total Visitor

095039
Total views : 174553

Recent Posts

  • ‘भारत ब्रांड’ का तीसरा चरण शुरू, महंगाई के बीच आम जनता को बड़ी राहत
  • कभ उनको भी तो कहने दो कि ये कैसी बकवास है….!
  • भविष्य मालिका ही क्यों चाहिए…!
  • प्राचीन Psychological Warfare पद्धति अर्थात “कृत्या स्त्री” और “कृत्या पुरुष”
  • रामायण और वेदों का संबंध

  • Facebook
  • Twitter
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.